रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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की बाधा उपस्थित नहीं होती और दूसरे बिना माँगे वस्त्र आभूष-
णादि पाकर स्त्री बहुत प्रसन्न होती है और वह कभी आवश्यकता
रहने पर भी किसी चीज की फरमाइश नहीं करेगी। इस प्रकार
बर्त्तन से पति-पत्नी में उत्तरोत्तर प्रीति बढ़ती ही रहेगी।
१२—जो अपनी स्त्री को पतिव्रता देखना चाहें वे स्वयं पत्नी-
व्रती बन जायें। उनके सामने राम का आदर्श मौजूद है।
१३—प्रायः मनुष्य स्त्रियों से गृह-सम्बन्धी कार्य न लेकर,
मजदूरनी आदि से काम ले लेते हैं। वे समझते हैं स्त्रियों को कष्ट
न हो किन्तु इसका परिणाम बड़ा बुरा यह होता है कि स्त्रियाँ
इतनी सुकुमार और आलसी हो जाती हैं जो आड़े वक्त पर अर्थात्
धनाभाव दशा में अपनी गृहस्थी का भार उठा नहीं पातीं। उस
समय अपनी करनी पर मनुष्य को पछताना पड़ता है। सुकुमारिता
और आलस्यता के कारण उनके शरीर निर्बल, निस्तेज तथा रोगी
होकर अकालकवलित हो जाते हैं। निर्बलता के कारण गर्भ स्थिर
नहीं होता, यदि गर्भ रह भी जाय तो कुछ समय बाद वह गिर
जाता है और यदि न गिरा तो बच्चा-जच्चा दोनों को जनमते समय मृत्यु
से युद्ध करना पड़ता है। प्रथम दोनों परलोक यात्रा कर जाते हैं,
बच रहे तो दोनों डॉक्टरों की सेवा में हमेशा उपस्थित रहते हैं।
यदि स्त्रियाँ घर के सभी काम में लगा दी जायें तो वे बलवती रहें,
उन्हें गर्भधारण से लेकर बच्चा जनने तक कोई आपत्ति उठानी न पड़े
और न डाक्टर वैद्यों की सेवा ही करनी पड़े। उदाहरण में आप