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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 105, कुल 440 में से

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पृष्ठ 105

१०४ असली कोकशास्त्र
प्रौढा
प्रौढ़ा में पति के सम्मुख लज्जा का अभाव-सा हो जाता है ।
उसमें किसी प्रकार का संकोच भाव शेष नहीं रह जाता । वह पति
का साथ एक क्षण के लिए भी नहीं छोड़ना चाहती । उसका
प्रत्येक अंग सुगठित और मनोहर होता है । उसकी मदमाती चाल
मन को लुभाती है । उसकी मदभरी आँखों में सदा नायक की
सूरत नाचती रहती है । भोग-विलास प्रिय नायक को वह अपनी
कुशलता से आनन्द विभोर कर देती है । उस काम-कला-निपुण
सुन्दरी को आलिंगन, चुम्बन, नखच्छेदन और आसनादि भेद
बहुत प्रिय लगते हैं ।
वृद्धा
वृद्धा आदर करने मीठी-मीठी बात करने, कथा-कहानी सुनने-
सुनाने से तृप्त हो जाती है । उसे रति सम्बन्धी बातों से कुछ
विशेष आनन्द प्राप्त नहीं होता ।
स्त्री प्रसङ्ग
परमपिता परमात्मा ने सृष्टि की रचना के लिये दो शक्तियें
निर्माण की हैं । एक प्राण, और दूसरी रयि । प्राण और रयि शक्ति
के एक साथ मिलने से एक नयी वस्तु पैदा हो जाती है । गेहूँ,
चना उर्द और बनस्पत्यादि सभी इसी नियम से उत्पन्न होते हैं ।