सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)

रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)

Raskhan Rachanavali with Hindi Commentary

रसखान (सैयद इब्राहिम) / पं. विद्यानिवास मिश्र द्वारा

DevanagariBrajpublished368 पृष्ठ

पृष्ठ 238, कुल 368 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 238

व्याख्या भाग २२१
पाठान्तर—
पहिले दधि लै गई गोकुल मे चख चार भए नटनागर पै ।
रसखान करी उन चातुरता कहै दान दे दान खरे अर पै ॥
नख ते सिख लौ पट नील लपेटि लली सब भाँति कँपे डर पै ।
मनु दामिनी साँवन के घन मे निकसे नहि भीतर ही तरपै ॥
सवैया
दानी नए भए माँगत दान सुने जु पे कंस तो बाँधे न जैहौ ।
रोकत हौ वन मे रसखानि पसारत हाथ महा दुख पैहौ ।
टूटे छरा बछरादिक गोधन जो धन है सु सबै पुनि रेहौ ।
जै है जो भूषन काहू तिया को तौ मोल छलाके लला न बिकैहौ । १०३ ॥
शब्दार्थ—दानी = कर वसूल करने वाले । सुने जु पे कंस तौ बाँधे न
जैहौ = यदि कंस सुन लेगा तो क्या बन्दी नही बना लिए जाओगे ? अर्थात् यह
जानकर कि तुम उसकी प्रजा को तंग करते हो, कंस तुम्हे बन्दी बना लेगा ।
छरा = गूँजा की माला । छला = छल्ला, अँगूठी ।
अर्थ—दही के लिए जबरदस्ती करते हुए कृष्ण को भय दिखाती हुई कोई
गोपी कहती है कि हे कृष्ण ! यह सुनकर कि तुम नये कर वसूल करने वाले
अपने आप ही बन गए हो, कंस तुम्हे पकड़वा कर बन्दी बना लेगा । तुम बन
मे हमारा मार्ग रोककर हमारे सामने दही के लिए हाथ फैलाते हो, इस प्रकार
की याचक वृत्ति से तुम्हे बहुत अधिक दुख भोगना पड़ेगा । इस छीना-झपटी
मे यदि किसी गोपी की गूँज की माला टूट गई तो उसकी क्षति-पूर्ति के लिए
तुम्हारे पास जो बछड़ा आदि धन है, वह सबका सब देना पड़ जायेगा । और
यदि संयोगवश किसी गोपी का कोई आभूषण टूट गया तो उसके एक छल्ले
के मूल्य मे ही तुम्हे बिक जाना पड़ेगा ।
तुलना—'चेरी न तेरी न तेरे बबा की मै घेरी गली मे का पैर लड़ैहसौ ।
जो तुम चाहत चाखन माखन सो तुम माखन नेकु न पैहौ ।
कंस के राज मे घूम नही वरि आई बबा की सौ बूंद न देहौ ।
टूटैंगौ हार हजार को तौ तुम नन्द जसोदा समेत बिकैहो ॥
—अज्ञात