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सर्वकोश
रसिकप्रिया (महाकवि केशवदास - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी व्याख्या, नायिका-भेद एवं शृंगार मनोविज्ञान)

रसिकप्रिया (महाकवि केशवदास - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी व्याख्या, नायिका-भेद एवं शृंगार मनोविज्ञान)

Rasikapriya: Nayika Bheda, Shringara Rasa evam Saundarya Manovigyan

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished286 पृष्ठ

पृष्ठ 74, कुल 286 में से

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पृष्ठ 74

तृतीय प्रभाव ७५
बैसा ही है जैसे पाप के कारण कोई राजा पृथ्वी की राज्यश्री छोड़कर नरक-
लोक में निवास करे ।
अलंकार — उदाहरण, रूपकातिशयोक्ति और अन्योक्ति ।
सूचना — यहाँ नायिका के कहने का तात्पर्य है कि नायक मुझ जैसी
पद्मिनी (नायिका) को छोड़कर गंदी एवम् कर्कशा हस्तिनी (नायिका)
के पास जाता है। नलिनी और करिनी शब्दों के दुहरे अर्थ के कारण इस
सवैये का अर्थ हस्तिनी नायिका और नायक (भ्रमर) पर घटित होता है ।
(दोहा)
(६०) ता नायक की नायिका, ग्रंथनि तीनि प्रमान ।
स्वीया परकीया अवर, स्वीया-परकीया न ।१४।
शब्दार्थ — अवर = (अपर) और। स्वीया-परकीया न = स्वकीया
और परकीया नहीं अर्थात् सामान्या, गणिका ।
सूचना -नायिकाओं के ये भेद धर्मानुसार किए जाते हैं ।
अथ स्वकीया-लक्षण
(६१) संपति बिपति जो मरनहू, सदा एक अनुहारि ।
ताहि स्वकीया जानिये, मन-बच-कर्म बिचारि ।१५।
शब्दार्थ — अनुहारि = समान । बच=वचन ।
स्वकीया-भेद
(६२) मुग्धा, मध्या, प्रौढ़ गति, तिनकी तीनि बिचारि ।
एक एक की जानियहुँ, चारि चारि अनुहारि ।१६।
शब्दार्थ — गति = अवस्था ।
मुग्धा-भेद
(६३) नवलबधू नवजोबना, नवलअनंगा नाम ।
लज्जा लिये जु रति करै, लज्जाप्राय सु बाम ।१७।
शब्दार्थ — लज्जाप्राय = लज्जाप्राया । वाम = स्त्री ।
अथ नवलवधू-मुग्धा-लक्षण
(६४) तासों मुग्धा नवबधू, कहत सयाने लोइ ।
दिन दिन दुति दूनी बढ़ै, बरनि कहै कबि कोइ ।१८।
१४—प्रमान-बखान । स्वीया-स्वक्रिया । स्वीया०-सामान्या सु प्रमान ।
१५—ताहि-ताको । जानियै-जानिजहुँ । बच कर्म-क्रम बचन । १६—गति-
मति । की जानियहुँ-के जानिये । १७—जोबना-यौवना । बाम-धाम- ।
१८-तासों-जासों । कोइ-सोइ ।