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सर्वकोश
रसिकप्रिया (महाकवि केशवदास - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी व्याख्या, नायिका-भेद एवं शृंगार मनोविज्ञान)

रसिकप्रिया (महाकवि केशवदास - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी व्याख्या, नायिका-भेद एवं शृंगार मनोविज्ञान)

Rasikapriya: Nayika Bheda, Shringara Rasa evam Saundarya Manovigyan

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished286 पृष्ठ

पृष्ठ 138, कुल 286 में से

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पृष्ठ 138

१४० रसिकप्रिया
सुनि को प्रतिउत्तर देइ सखी दृग आँसुन की अवली उमही ।
उर लाइ लई अकुलाइ तऊ अधिरातक लौं हिलकी न रही ।४४।
शब्दार्थ—जा कहँ = जिसको । तात = पिता । रस = प्रेम । अधिरातक
लौं = आधी रात तक । हिलकी = सिसक ।
भावार्थ—(सखी की उक्ति सखी से) एक बार श्रीकृष्ण ने एक गोपिका
से हँसी की, यह बात कही कि ‘जिसे स्वयम् पिता ने छोड़ दिया उससे मेरा
प्रेम-व्यापार क्या रह सकता है ? (कभी नहीं)’ । इसका प्रत्युत्तर भला कौन
देता, उस गोपिका के नेत्रों से आँसुओं की धारा उमड़ चली । तब श्रीकृष्ण
ने अकुलाकर उसे हृदय से लगा लिया । फिर भी आधी रात तक उसकी
सिसकी रुक न सकी ।
अलंकार—विशेषोक्ति ।
सूचना—‘तात दई तजि ताहि’ का अर्थ ‘सरदार’ ने यह भी लगाया है
कि पिता ने जिसे तुझे दे रखा है पहले उसे तू त्याग ।
अथ विच्छित्ति हाव-लक्षण—( दोहा )
(२२५) भूषन भुषिबे को जहाँ, होहि अनादर आनि ।
तहाँ बिच्छित्ति बिचारिये, केसवदास बखानि ।४५।
शब्दार्थ—भूषन = गहना । भुषिबे०=जहाँ गहने पहनने का अनादर हो
अर्थात् बिना सजे-सिंगारे ही शोभा हो ।
श्रीराधिकाजू को विच्छित्ति हाव, यथा—( सवैया )
(२२६) तन आपने भाए सिंगार सिंगारत हैं ये सिंगार सिंगारै बृथाहीं ।
ब्रजभूषन नैननि भूख है जाकी सु तो पै सिंगार उतारे न जाहीं ।
सब होत सुगंधनिहीं तें सुगंध सुगंध तें जाति सुगंध सुबाहीं ।
सखि तोहि तें हैं सब भूषन भूषित भूषन तें तुम भूषित नाहीं ।४६।
शब्दार्थ—भाए = ( नायक को ) भानेवाले । सुबाहीं=स्वभाव से ही,
स्वाभाविक ।
भावार्थ—( सखी की उक्ति नायिका प्रति ) हे सखी, अपने को रुचने-
वाले शृंगार ही सब सिंगारते हैं, तूने ये शृंगार व्यर्थ ही किए । ब्रजभूषण के
नेत्रों में जिस शृंगार के देखने की भूख (इच्छा) है वे शृंगार क्या कभी (चढ़ाए)
४४—जा-या । ताहि जाहि । रस-रति । सुनि- × । ४५—तहाँ०-तहूँ
विच्छित्ति, सो बिच्छित्ति । बखानि-सुजान । ४६—सिंगार०-सिंगार नहीं
ये सिंगार । सिंगारत ०-सिंगारति और, सिंगारत होइ सुगंध । भूख है०-भूषित
नैनन । उतारे-उतारि, सिंगारे । सब-सचु । तें-मैं । जाति-जातें । सुबाहीं-
बृथाहीं । तोहि तें०-भूषन तो सब तोहि तें । तुम-तुव ।