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सर्वकोश
रसिकप्रिया (महाकवि केशवदास - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी व्याख्या, नायिका-भेद एवं शृंगार मनोविज्ञान)

रसिकप्रिया (महाकवि केशवदास - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी व्याख्या, नायिका-भेद एवं शृंगार मनोविज्ञान)

Rasikapriya: Nayika Bheda, Shringara Rasa evam Saundarya Manovigyan

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished286 पृष्ठ

पृष्ठ 134, कुल 286 में से

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पृष्ठ 134

़१३६ रसिकप्रिया
भावार्थ— (सखी की उक्ति सखी से) हे सखी, वृषभानु की पुत्री राधिका
ने आज श्रीकृष्ण को उलाहना दिया, फिर गाली तक दी, मन में प्रेम की
कमी करके अर्थात् ईषत् रोष से कमलों की मार भी दी। फिर (ठंडी पड़कर)
नवीन सुगंधित द्रव्य उनके शरीर में लगाकर और उन्हें छाती से चिपकाकर
सीख दी और श्रीकृष्ण ने (बिना कुछ कहे सुने चुपचाप) सुख पाकर उसे
ग्रहण किया, इन सबका उत्तर देने के लिए नंदकुमार ने अपना सिर नीचे से
थोड़ा भी ऊपर नहीं किया (सिर जो नीचा किया तो वह नीचे का नीचे
ही रह गया, फिर उठाया ही नहीं, एक चुप तो सौ चुप) ।
अथ विलास हाव-लक्षण— (दोहा)
(२१६) खेलत बोलत हँसत अरु, चितवत चलत प्रकास।
जल थल केसवदास कहि, उपजत हाव बिलास।३६।
श्रीराधिकाजू को विलास हाव, यथा—(कवित्त)
(२१७) किलकत्त अलिक जु तिलक-चिलक मिस,
भौंहनि में बिभ्रमनि भावभेद दीने हैं।
लोचननि सोचन-सकोचनि नचावति है,
दसनचमक ही चकित चित्त कीने हैं।
केसौदास मंदहास अनायास दास करि,
लीने केसौराय जिय जद्यपि प्रबीने हैं।
मोहन के तन मन मोहिबे कौं मेरी आली,
तेरो मुख सुख ही अनंत ब्रत लीने हैं।३७।
शब्दार्थ—अलिक = भाल, माथा। चिलक = चमक। भावभेद = अनेक
भाव। बास = सुगंध। अनायास = बिना श्रम के। सुख ही = सरलता से।
भावार्थ—(सखी की उक्ति नायिका प्रति) हे सखी, श्रीकृष्ण के शरीर
एवम् मन को वशीभूत करने के लिए तेरे मुख ने अनेक ब्रत (ढंग) किए
हैं। माथे पर तिलक की चमक का बहाना उन्हें किलकाता है (आनंदित
करता है)। भौहों के अनेक विलासों (भंगिमाओं) से उनमें भावों के अनेक
स्वरूप लक्षित होते हैं। नेत्रों के सोच और संकोच की मुद्रा से तू उन्हें नचाती
है, दाँत की चमक ने तो उनके चित्त को ही चकित कर दिया है। अपने मंद
हास से तो उन्हें अनायास ही अपना दास बना लिया है, यद्यपि वे बड़े
प्रवीण गिने जाते हैं (अर्थात् तेरे मुख की चेष्टाओं का अत्यधिक प्रभाव उन
पर पड़ता है)।
३६—हाव-विविध । ३७-भाव-भौन । केसौदास०-मंदहास मुखबास ।
केसौराय-केसौदास । प्रबीने-नवीने । आली-सखी, भटू ।