सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

Rasendra Sara Sangraha of Gopalakrishna with Commentary

गोपालकृष्ण भट्ट (टीकाकार: पं. रामप्रसाद वैद्य) द्वारा

DevanagariHindipublished584 पृष्ठ

पृष्ठ 541, कुल 584 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 541

भाषाटीकासहित । (५१५)
बृहत्सूतिकाविनोद रस।
शुण्ठ्या भागो भवेदेको द्वौ भागौ मरिचस्य च ।
पिप्पल्याश्च त्रिभागं स्यादर्द्धभागश्च व्योमकम् ॥५॥
जातीकोषस्य भागौ द्वौ द्वौ भागौ तुत्थकस्य च ।
सिन्धुवारजलेनैव मर्दयेदेकयामतः ॥
मधुना सह भोक्तव्यः सूतिकातङ्कनाशनः ॥ ६ ॥
सोंठ १ भाग, मरिच २ भाग, पीपल ३ भाग, अभ्रकभस्म आधा
भाग, जायफल २ भाग और तूतिया २ भाग लेवे । इन सब औष-
धियोंको एकत्र पीसकर सम्हालूके पत्तोंके रसमें एक प्रहरतक खरल
करके सहतके साथ भक्षण करे तो सूतिकारोग नष्ट होता है । इसको
बृहत्सूतिकाविनोद रस कहते हैं ॥ ५ ॥ ६ ॥
सूतिकारि रस ।
टङ्गणं मूर्च्छितं सूतं गन्धकं हेम तारकम् ।
जातीफलं तथा कोषं लवङ्गैला च धातकी ॥ ७ ॥
वत्सकेन्द्रयवं पाठा शृङ्गीविश्वाजमोदिका ।
गुटी प्रसारिणीरसैश्चतुर्गुञ्जाप्रमाणतः ॥ ८ ॥
भावयेत्तद्रसैः प्रातः सूतिकातङ्कशान्तये ।
जीर्णज्वरं तथा शोथं ग्रहणीप्लीहकासनुत् ॥ ९ ॥
सुहागा, रससिन्दूर, गंधक, सोनाभस्म, चांदीभस्म, जायफल,
जावित्री, लौंग, इलायची, धायके फूल, कुड़ेकी छाल, इन्द्रजौ, पाठ,
काकड़ासिंगी, सोंठ और अजवायन इन सब औषधियोंको समान
भाग लेकर प्रसारणीके रसमें खरल करके चार चार रत्तीकी गोली
बना लेवे । प्रतिदिन प्रातःकाल प्रसारणीके रसके साथ एक गोली
खाय तो अवश्य प्रसूताके रोग नष्ट होते हैं । इससे जीर्णज्वर, शोथ,
संग्रहणी, प्लीहा और कासरोग नष्ट होते हैं ॥ ७-९ ॥