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सर्वकोश
रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

Rasendra Sara Sangraha of Gopalakrishna with Commentary

गोपालकृष्ण भट्ट (टीकाकार: पं. रामप्रसाद वैद्य) द्वारा

DevanagariHindipublished584 पृष्ठ

पृष्ठ 407, कुल 584 में से

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पृष्ठ 407

भाषाटीकासहित । ( ३८१ )
आमवातगजसिंह मोदक ।
शुण्ठीचूर्णस्य प्रस्थैकं यमान्याश्च पलाष्टकम् ।
जीरकस्य पले द्वे च धन्याकञ्च पलद्वयम् ॥ २१ ॥
पलैकं शतपुष्पाया लवङ्गस्य पलं तथा ।
टङ्गणस्य पलं भृष्टं मरिचस्य पलत्रयम् ॥ २२ ॥
त्रिवृतात्रिफलाक्षारपिप्पलीनां पलं तथा ।
शट्चेला तेजपत्रञ्च चविकानां पलन्तथा ॥ २३ ॥
अभ्रं लौहं तथा वंगं प्रत्येकञ्च पलं पलम् ।
एतेषां सर्वचूर्णानां खण्डं दद्याद्गुणत्रयम् ॥ २४ ॥
घृतेन मधुना मिश्रं कर्षमात्रन्तु मोदकम् ।
एकैकं भक्षयेत्प्रातर्घृतञ्चानुपिबेत्पयः ॥ २५ ॥
शूलघ्नो रक्तपित्तघ्नश्चाम्लपित्तविनाशनः ।
आमवातकुलध्वंसी केशरी विधिनिर्मितः ॥ २६ ॥
सोंठका चूर्ण १ प्रस्थ, अजवायनका चूर्ण आठ पल, जीरेका चूर्ण
२ पल, धनियेका चूर्ण २ पल, सौंफका चूर्ण १ पल, लौंगका चूर्ण
१ पल, सुहागा १ पल, काली मिरचोंका चूर्ण ३ पल, निसोथका चूर्ण
१ पल, हरड़का चूर्ण १ पल, बहेड़ेका चूर्ण १ पल, आमलेका चूर्ण
१ पल, जवाखार १ पल, पीपलका चूर्ण १ पल, कचूर १ पल,
इलायचीका चूर्ण १ पल, तेजपातका चूर्ण १ पल, चव्यक चूर्ण
१ पल, अभ्रकभस्म १ पल, लोहाभस्म १ पल और वंगभस्म
१ पल लेवे और सब औषधिसे तिगुनी स्वच्छ खांड लेवे, सब औष-
धियोंको एकत्र पीसकर घृत और सहत मिलाकर एक एक कर्षके
मोदक बना लेवे । प्रतिदिन प्रातःकाल इस एक मोदकको भक्षण
करे और ऊपरसे घृत और दूधका अनुपान करे । इन मोदकोंके