रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)
Rasendra Sara Sangraha of Gopalakrishna with Commentary
गोपालकृष्ण भट्ट (टीकाकार: पं. रामप्रसाद वैद्य) द्वारा
पृष्ठ 296, कुल 584 में से
संदर्भ में पढ़ें( २७० ) रसेन्द्रसारसंग्रह ।
लेवे । सबको एकत्र पीसकर घृत और शहदमें मिलाकर सेवन करनेसे
कामला और पांडुरोग नष्ट होते हैं ॥ २७ ॥
पांडुरोगपर पथ्यापथ्य ।
शालियष्टिकगोधूमयवमुद्गादयो हिताः ।
रसाश्च जांगलभवा मधुराः पाण्डुरोगिणाम् ॥ २८ ॥
शालिधान, साँठीधान, गेहूं, जौ और मूंग आदि अन्न, जांगलप्रदे-
शके जीवोंके मांंसरस और मधुर रसवाले पदार्थ यह सब पांडुरोगि-
योंको हितकारी हैं ॥ २८ ॥
अथ कामलाचिकित्सा ।
पाण्डुरोगोदिता योगा घ्नन्ति ते कामलामपि ॥२९॥
जो प्रयोग पांडुरोगमें कहे हैं वह सब कामलारोगको भी नष्ट
करते हैं ॥ २९ ॥
चन्द्रसूर्यात्मक रस ।
सूतकं गन्धकं लौहमभ्रकञ्च फलं पलम् ।
शंखटंकवराटं च प्रत्येकार्द्धपलं हरेत् ॥ ३० ॥
गोक्षुरबीजचूर्णञ्च पलैकं तत्र दीयते ।
सर्वमेकीकृतं चूर्णं बाष्पयन्त्रे विभावयेत् ॥ ३१ ॥
पटोलपर्पटौ भार्ङ्गी विदारीशतपुष्पिका ।
दन्ती वासा कुण्डली च काकमाचीन्द्रवारुणी ॥३२॥
वर्षाभूकेशराजञ्च शालिश्च द्रोणपुष्पिका ।
प्रत्येकार्द्धपलैर्द्रवैर्भावयित्वा वटीं कुरु ॥ ३३ ॥
चतुर्दशवटीं खादेच्छागीदुग्धानुपानतः ।
गहनानन्दनाथोक्तश्चन्द्रसूर्यात्मको रसः ॥ ३४ ॥