रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)
Rasendra Sara Sangraha of Gopalakrishna with Commentary
गोपालकृष्ण भट्ट (टीकाकार: पं. रामप्रसाद वैद्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंभाषाटीकासहित । ( ३ )
आयुर्वेदके ज्ञाताओंने संपूर्ण औषधियें साध्य रोगोंके लियेही कही
हैं । परंतु पारद् असाध्य रोगोंकोभी दूर करता है इस लिये यह सब
ओषधियोंसे श्रेष्ठ माना है ॥ ५ ॥
हतो हन्ति जरां व्याधिं मूर्च्छितो व्याधिघातकः ।
बद्धः खेचरतां धत्ते कोऽन्यः सूतात्कृपाकरः ॥ ६ ॥
पारेकी भस्म-बुढापा और सम्पूर्ण वलीपलित आदि रोगोंको दूर
करती है । मूर्च्छित पारद् ( रससिंदूर, मकरध्वज आदि ) संपूर्ण व्याधि-
योंको नष्ट करता है । और “ जलौका बद्ध ” या “ खेचरी गुटिका”
हो जानेपर आकाशमें गमन करनेकी शक्ति देता है। अत एव पारदसे
बढकर और कौन ऐसी कृपा करनेवाला हो सकता है ॥ ६ ॥
रसके पर्यायवाचक शब्द ।
रसेन्द्रः पारदः सूतः सूतराजश्च सूतकः ।
शिवतेजो रसः सप्त नामान्येवं रसस्य तु ॥·७॥
रसेंद्र, पारद, सूत, सूतराज, सूतक, शिवतेज, रस ये सात नाम
पारदके हैं ॥ ७ ॥
शिवबीजो रसः सूतः पारदश्च रसेन्द्रकः ।
एतानि रसनामानि तथान्यानि यथा शिवे ॥ ८ ॥
अथवा शिवबीज, रस, सूत, पारद, रसेंद्र और जितने नाम शिवके
हैं वह सब पारदके जानने ॥ ८ ॥
उत्तम पारदकी परीक्षा ।
अन्तः सुनीलो बहिरुज्ज्वलो यो
मध्याह्नसूर्यप्रतिमप्रकाशः ।
शस्तोऽथ धूम्रः परिपाण्डुरश्च
चित्रो न योज्यो रसकर्मसिद्धौ ॥ ९ ॥
जो पारद् भीतरसे नीलवर्ण हो, बाहरसे उज्ज्वल वर्ण और मध्या-