रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)
Rasendra Sara Sangraha of Gopalakrishna with Commentary
गोपालकृष्ण भट्ट (टीकाकार: पं. रामप्रसाद वैद्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंरसेन्द्रसारसंग्रह ।
भाषाटीकासहित ।
मङ्गलाचरण ।
रसेन्द्रमिव निःशेष-जरा-व्याधि-विनाशनम् ।
प्रणमामि गुरु भक्त्या शङ्करं योगसाधनम् ॥ १ ॥
टीकाकारोक्त मङ्गल ।
प्रणम्य श्रीशिवं भक्त्या यत्र तत्र शिवप्रदम् ।
करोम्यहं नृवाण्यां वै रसेन्द्रसारसंग्रहम् ॥ १ ॥
क्व चास्ति रससंसिद्धिः क्व चायुर्वेदसागरः ।
क्व वै रामप्रसादोऽहं भिषक्कीर्त्यभिलाषुकः ॥ २ ॥
यथा तथा गमिष्यामि मन्थानं गुरुदर्शितम् ।
चक्षुर्युक्तैः सहाऽन्धोपि सुमार्गे गच्छति ध्रुवम् ॥ ३ ॥
दोहा—सर्वत्र हि कल्याणप्रद, गिरिजा सहित महेश ।
करि प्रणाम उस देवको, सगरे टरत कलेश ॥ १ ॥
रससंग्रह इस ग्रंथको, हिन्दीमें अनुवाद ।
यथा तथा कछु करत हौं, जडमति रामप्रसाद ॥ २ ॥
कहँ सिद्धी रसराजकी, अरु आयुर्वेद अपार ।
कहँ चाहत यश महतको, रामप्रसाद सुधार ॥ ३ ॥
अथवा गुरुदर्शितपथा, गमिहौं हौं मतिमन्द ।
शुभ मग सहजहि जात है, नेत्रवान सँग अन्ध ॥ ४ ॥