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सर्वकोश
रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

Rasendra Sara Sangraha of Gopalakrishna with Commentary

गोपालकृष्ण भट्ट (टीकाकार: पं. रामप्रसाद वैद्य) द्वारा

DevanagariHindipublished584 पृष्ठ

पृष्ठ 247, कुल 584 में से

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पृष्ठ 247

भाषाटीकासहित । ( २२१ )
अग्निकुमार रस।
रसं गन्धं विषं व्योषं टंकणं लौहभस्मकम् ।
अजमोदाहिफेनञ्च सर्वतुल्यं मृताभ्रकम् ॥
चित्रकस्य कषायेण मर्दयेद्याममात्रकम् ॥ २२॥
मरिचाभां वटीं खादेदजीर्णं ग्रहणीन्तथा ।
नाशयेन्नात्र सन्देहो गुह्यमेतच्चिकित्सितम् ॥
रसश्चानिकुमारोऽयं दीपयत्याशु पावकम् ॥ २३ ॥
पारा, गन्धक, विष, सोंठ, मरिच, पीपल, सुहागा, लोहभस्म, अजमोद
और अफीम यह प्रत्येक औषधि एक एक भाग और सब औषधियोंके
बराबर अभ्रककी भस्म इन सबको एकत्र चीतेकी जड़के रस या काथमें
भावना देकर मरिचकी बराबर गोली बनालेवे । इन गोलियोंके सेवन
करनेसे अजीर्ण और संग्रहणी रोग नष्ट होते हैं । यह जठराग्निको बहुत
जल्दी प्रदीप्त करता है। इसको अग्निकुमार रस कहते हैं ॥२२॥२३ ॥
नृपतिवल्लभ रस ।
जातीफललवङ्गाब्दत्वगेलाटंकरामठम् ।
जीरकं तेजपत्रञ्च यमानीविश्वसैन्धवाः ॥ २४ ॥
लौहमभ्रं रसो गन्धताम्रं प्रत्येकशः पलम् ।
मरिचं द्विपलं दत्त्वा छागीक्षीरेण पेषयेत् ॥ २५ ॥
धात्रीरसेन वा पेष्यं वटिकाः कुरु यत्नतः ।
श्रीमद्गहननाथेन विचिन्त्य परिनिर्मितः ॥ २६ ॥
जायफल, लौंग, नागरमोथा, दालचीनी, इलायची, सुहागा,
हींग, जीरा, तेजपात, अजवायन, सेंधानमक, सोंठ, लोहभस्म, अभ्रक-
भस्म, पारा, गन्धक और तांबेकी भस्म यह प्रत्येक औषधि चार चार
तोले तथा कालीमिरच ८ तोला इन सबको एकत्र बकरीके दूधमें
पीसकर अथवा आंमलोंके रसमें पीसकर दो दो रत्तीकी गोली