रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)
Rasendra Sara Sangraha of Gopalakrishna with Commentary
गोपालकृष्ण भट्ट (टीकाकार: पं. रामप्रसाद वैद्य) द्वारा
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जयन्ती वा जया वाथ मेहं हन्ति सुराह्वयम् ।
जयन्ती वा जया वाथ मधुना मेहजिद्भवेत् ॥२६॥
जयावटी अथवा जयन्तीवटीको दूधके साथ सेवन करनेसे पाण्डुरोग
और सूजन नष्ट होती है । जयावटी अथवा जयन्तीवटीको चावलोंके
जलके साथ सेवन करनेसे सब प्रकारकी अश्मरी और दारुण मूत्र-
कृच्छ्र रोग दूर होता है । जयावटी अथवा जयन्तीवटीको गोमूत्रके
साथ सेवन करनेसे और गोमूत्रमें पीसकर लेप करनेसे काकणकुष्ठ और
गलितकुष्ठ नष्ट होता है । जयावटी अथवा जयन्तीवटीको आठ मासे
केतकीकी जड़के साथ जलमें पीसकर सेवन करनेसे सुरामेह नष्ट
होता है । जयन्ती अथवा जयावटीको शहदके साथ सेवन करनेसे
प्रमेह रोग नष्ट होता है ॥ २३-२६ ॥
लोध्रमुस्ताभयातुल्यं कट्फलञ्च जलैः सह ।
क्वाथयित्वा पिबेच्चानु मधुना सर्वमेहजित् ॥ २७ ॥
जयन्ती वा जया वाथ गुडैः कोष्णजलैः पिबेत् ।
त्रिदोषोत्थं हरेद्गुल्मं रसो वानन्दभैरवः ॥ २८ ॥
जयन्ती अथवा जया वटीको लोध, नागरमोथा, हरड़ और काय-
फलके क्वाथमें शहद मिलाकर सेवन करनेसे सब प्रकारका प्रमेह रोग
नष्ट होता है । जयन्ती अथवा जयावटिकाको गुड और मन्दोष्ण
जलके साथ सेवन करनेसे त्रिदोषजनित गुल्मरोग नष्ट होता है । अथवा
आनन्दभैरव रसके सेवन करनेसे गुल्मरोग नष्ट होता है ॥ २७॥ २८ ॥
जयन्ती वा जया हन्ति शुण्ठ्या सर्वं भगन्दरम् ।
जयन्ती वा जया वाथ तक्रेण ग्रहणीप्रणुत् ॥२९॥
जयन्ती वा जया वाथ रसश्चानन्दभैरवः ।
रक्तपित्ते त्रिदोषोत्थे शीततोयेन पाययेत् ॥ ३० ॥