रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)
Rasendra Sara Sangraha of Gopalakrishna with Commentary
गोपालकृष्ण भट्ट (टीकाकार: पं. रामप्रसाद वैद्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १०० ) रसेन्द्रसारसंग्रह ।
गुञ्जादिबीजशोधन ।
गुञ्जादिसर्वबीजानां नरमूत्रैः पटुं विना ।
नारिकेलाम्बुना शोध्यं बिल्वं भल्लातकोद्भवम् ॥९४॥
रत्तक आदि विषैले बीज नमकके बिना ही मनुष्यके मूत्रमें भावना
देनेसे शुद्ध होजाते हैं। नारिकेलके जलमें बेलके बीज और भिलावेके
बीजोंको शोधन करना चाहिये ॥ ९४ ॥
गुग्गुलशोधन ।
गुडूचीत्रिफलाक्वाथे क्षीरे चैव विशेषतः ।
पक्त्वा च खण्डशः शुद्धं गृह्णीयान्मृदुगुग्गुलुम् ३९५॥
इति श्रीगोपालकृष्णसूरिविरचिते रसेन्द्रसारसंग्रहे
पूर्वखण्डः समाप्तः ।
उत्तम नवीन गुग्गुलके छोटे २ टुकड़े कर गिलोयके क्वाथमें,
त्रिफलेके क्वाथमें और गोदुग्धमें पकानेसे गुग्गुल शुद्ध होजाती है ।
( प्रथम गुग्गुलको टुकड़े २ कर गिलोय या त्रिफलेके क्वाथमें भिगोदे,
दूसरे दिन उबाल ले जब क्वाथमें गूगल घुल जावे तो वस्त्रमें छान ले
बाकी रहे गूगलको फिर क्वाथमें पकाकर छान ले, कंकड़ तिनका
आदि दूर फेंककर कड़ाहीमें क्वाथको खोयेके समान गाढ़ा कर
पिण्डसा बननेपर गुग्गुलको शुद्ध जाने यह गुग्गुल सब औषधि-
प्रयोगमें काम लेवे ) ॥ ३९५ ॥ इति गुग्गुल शोधन ॥
दोहा-रस धातु मणि आदिको, शोधन मारण भेद ॥
इहि विधि जानहिं जे भिषक्, हरहिं जगत्को खेद ॥
होहिं चतुर रसकर्ममें, पढ भाषा अनुवाद ॥
प्रथम खण्ड पूरित भयो,तिलकित रामप्रसाद ॥
इति श्रीपटियालाराज्यस्थवैद्यरत्न रामप्रसादराजवैद्यवैद्योपाध्यायकृत-
भाषाटीकायां पूर्वखण्डः समाप्तः ।