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सर्वकोश
रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

Rasendra Sara Sangraha of Gopalakrishna with Commentary

गोपालकृष्ण भट्ट (टीकाकार: पं. रामप्रसाद वैद्य) द्वारा

DevanagariHindipublished584 पृष्ठ

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पृष्ठ 122

( ९६ ) रसेन्द्रसारसंग्रह ।
डाल दे, इसप्रकार तीन दिन करे फिर निकालकर तीव्र धूपमें सुखा ले।
इसप्रकार शोधन किया विष जिस योगमें जितना डालना लिखा
हो उतना डाले ॥ ७७ ॥ ७८ ॥ इति विष शोधन ॥
सात उपविष ।
अर्कस्सेहुण्डधत्तूरलाङ्गलीकरवीरकाः ।
गुञ्जाहिफेनावित्येताः सप्तोपविषजातयः ॥ ७९ ॥
आक, थोहर, धतूरा, लांगलीकंद, कनेर, गुंजा ( रत्तक ) और
अफीम यह सात उपविषोंकी जातियां हैं ॥ ७९ ॥
उपविष शोधन ।
धत्तूरस्य च यद्बीजमन्यच्चोपविषं च यत् ।
तच्छोध्यं दोलिकायन्त्रे क्षीरपूर्णेऽथ पात्रके ॥३८०
धतूरेके बीज या अन्य उपविष जो शोधन करना हो उसको
पोटलीमें बांध दुग्धयुक्त पात्रमें लटका दोलायन्त्रविधिसे पकावे तो
शुद्ध होजाते हैं ॥ ३८० ॥
जमालगोटेका शोधन ।
निस्तुषं जयपालश्च द्विधा कृत्वा विचक्षणः ।
एतद्बीजस्य मध्यन्तु पत्रवत्परिवर्जयेत् ॥ ८१ ॥
अष्टमांशेन चूर्णेन टङ्कणस्य च मेलयेत् ।
त्रिरात्रं गोमये क्षिप्त्वा पाच्यं दुग्धेन संप्लुतम् ।
एवं वै शुद्धिमायाति जैपालममृतोपमम् ॥ ८२ ॥
जमालगोटेके छिलके दूर कर उनकी गिरीकी दो दो दालसी काट-
कर अन्दरसे सफेद पत्ती ( जीभी ) दूर कर दे, फिर इनमें आठवां
भाग सुहागा मिलाकर पोटली बांध गायके गोबरमें डुबोकर रक्खे
तीन दिनके बाद निकाल कर गरम पानीसे धो डाले, फिर पोटलीमें