सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary

सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished799 पृष्ठ

पृष्ठ 638, कुल 799 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 638

त्रयोविंशस्तरङ्गः ६१३.
द्वितीयः शोधनप्रकारः
अगस्त्यद्रवयोगेन यामं स्विन्नमनारतम् ।
दोलायन्त्रे पोट्टलीस्थं शुद्धिमायाति मौक्तिकम् ॥ ६८ ॥
जयन्तीस्वरसेनेति मौक्तिकशोधनम्—"जयन्त्या मौक्तिकं शुचि" इति
स्मरणात् , अथवा अगस्त्यपत्रस्वरसेन स्वेदनात् शुद्धयति । तथा सुराप्रदीपवह्निना
चूर्णोदकेन पाचितं शुद्धयति मौक्तिकम् ॥ ६८ ॥
भा.टी.—मोतियों को एक कपड़े की पोटली में बाँधकर दोलायन्त्र में
अगस्त्यस्वरस डालकर उसमें एक याम ( तीन घण्टे ) तक स्वेदन कर लेने से
वे शुद्ध हो जाती हैं ॥ ६८ ॥
तृतीयः शोधनप्रकारः
सुराप्रदीपवह्निना शरावगं तु मौक्तिकम् !
सुधोदकेन पाचितं विशुद्धिमेत्यनुत्तमाम् ॥ ६६ ॥
भा.टी.—मोतियों को एक शराव ( चीनी के प्याले ) में रख उसमें चूने
का जल डालकर इस प्याले को सुराप्रदीप की अग्नि से तीन घंटे पका लेने से
भी मुक्ता शुद्ध हो जाती है ॥ ६६ ॥
मौक्तिकमारणस्य प्रथमः प्रकारः
विमलं मौक्तिकं गव्यपयसा परिपेषितम् ।
त्रिधा लघुपुटे पक्वं मृतं स्याच्छशिसुन्दरम् ॥ ७० ॥
भा.टी.--शुद्ध की हुई मोतियों को एक उत्तम खरल में डालकर गोदुग्ध
के साथ अच्छी तरह घोंटकर सुखा लें । अब इस श्वेतचूर्ण को एक सम्पुट में
बन्द करके लघुपुट में फूँक देवें। इस तरह तीन लघुपुट देने से मौक्तिक की
चन्द्रमा के समान स्वच्छ वर्ण की भस्म हो जाती है ॥ ७० ॥
द्वितीयो मारणप्रकारः
मुक्ताफलन्तु तरुणीपरिस्रुतजलान्वितम् ।
पिष्टं त्रिवारं पुटितं मृतिमाप्नोत्यनुत्तमाम् ॥ ७१ ॥
मारणप्रकारः--गोपयसा यद्वा तरुणीपरिस्रुतजलेन शतपत्रीपुष्पार्केण "अर्क
गुलाब" इति प्रसिद्धेन पेषितं त्रिधा पुटितं भस्मीभवति मुक्ताफलम् ॥ ७१ ॥
भा.टी.—शुद्ध मोतियों को एक उत्तम खरल में डालकर उसमें उत्तम
अर्क गुलाब डालकर खूब अच्छी तरह घोटें और सुखा लें । अब इसको सम्पुट
में बन्द करके लघुपुट में फूँक दें । इस विधि से तीन पुट देने से मोतियों की
भस्म हो जाती है ॥ ७१ ॥