रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)
Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary
सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंएकविंशस्तरङ्गः ५६५
सजलं गन्धकद्रावं शनैस्तस्मिन् विनिक्षिपेत् ॥ २३४ ॥
तावन्तं द्रावकं दद्याद्यावता द्रुतिमाप्नुयात् ।
क्षणेनैवोष्णतां याति फेनञ्चोत्तिष्ठते परम् ॥ २३५ ॥
ततः सारकपत्रेण सारयेद् रसकोविदः ।
मलं सारकपत्रस्थं हित्वा द्रवमिहाहरेत् ॥ २३६ ॥
द्रवोन्मितां क्षिपेत्तीव्रां निर्जलां विमलां सुराम् ।
सुरानिक्षेपणाद् याति कासीसं तु तलस्थताम् ॥ २३७ ॥
ततो द्रवमिमं हित्वा चूर्णं घर्मे निधापयेत् ।
भानुभानुत्रिशुष्कन्तु कासीसं जायतेऽमलम् ॥ २३८ ॥
द्विभागिकन्तु कासीसं सलिले तु त्रिभागिके ।
निक्षिप्तं द्रवतां यातीत्याहू रसविशारदाः ॥ २३६ ॥
अथ कासीसनिर्माणप्रकारो विशुद्धं लोहचूर्णमित्यादिना । गन्धकद्रावकक्षे-
पञ्च लोहचूर्णद्रुतिसाधनापर्य्यन्तम् । भानोः सूर्य्यस्य, भानवः किरणाः, तैः
शुष्कम् । निर्जलं विमला सुरा “Absolute Alcohol” इति नाम्ना प्रसिद्धा ।
स्पष्टमन्यत् ॥ २३४-२३६ ॥
भा.टी.—एक काँच के पात्र में शुद्ध लोहचूर्ण लेकर उसमें थोड़ा-थोड़ा
करके सजल गन्धकद्राव तब तक डालें जब तक कि वह सम्पूर्ण लोहचूर्ण अच्छी
तरह से घुल न जाय । गन्धक का तेजाब डालने पर लोहचूर्ण एकदम गरम
होता है और पात्र में से झाग निकलने लगता है । जब झाग निकलना बन्द
हो जाय और लोहचूर्ण घुल जाय तो इसे सारकपत्र (Filter paper) में
छान लें । सारकपत्र में जो मैल रह जाय तो उसे अलग करके फेंक दें और
द्रव को ले लें । अब द्रव में समभाग स्वच्छ और शुद्ध सुरा (Absolute
Alcohol) डाल दें । सुरा डालने से कासीस पात्र के तलप्रदेश में बैठ
जायगा । ऊपर के द्रव को किसी पात्र में ले लें और नीचे के कासीस को धूप
में रखकर सुखा लें । इस प्रकार सूर्यकिरणों से सूखा हुआ कासीस स्वच्छ हो
जाता है । इस प्रकार से बनाया हुआ कासीस दो भाग को तीन भाग जल में
डालें तो वह उसमें अच्छी तरह घुल जाता है ॥२३४-२३६॥
कासीसद्रवस्य निर्माणप्रकारः
सार्द्धद्वितोलकमिते सलिले तु परिस्रुते ।
पञ्चगुञ्जोन्मितं शुद्धं कासीसं निक्षिपेद् बुधः ॥ २४० ॥