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सर्वकोश
रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary

सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished799 पृष्ठ

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ताम्र शोधन ४११ | भूनाग सत्व का आमयिक प्रयोग ४३४
द्वितीयताम्र शोधन ,, | मयूर पिच्छ का सत्व पातन ,,
तृतीय शोधन ४१२ | अष्टादश तरङ्ग
चतुर्थ शोधन ,, | वङ्ग (रांगा) का नाम ४३५
पञ्चम शोधन ,, | वङ्ग के दो भेद ,,
छठा शोधन ,, | खुरक का लक्षण ,,
ताम्र मारण ४१३ | मिश्रक का लक्षण ४३६
द्वितीय ताम्र मारण ,, | ग्राह्य और हेय वङ्गका स्वरूप ,,
तृतीय मारण ४१४ | वङ्ग शोधन का फल ,,
चतुर्थ मारण ,, | वङ्ग शोधन ४३७
पञ्चम मारण ४१५ | द्वितीय वङ्ग शोधन ,,
छठा मारण ४१६ | तृतीय शोधन ४३८
अमृतीकरण का फल ,, | चतुर्थ शोधन ,,
ताम्र के आठ दोष ४१७ | वङ्ग मारण ,,
अमृतीकरण ,, | द्वितीय वङ्ग मारण ४३६
द्वितीय अमृतीकरण ४१८ | तृतीय वंग मारण ४४०
तृतीय अमृतीकरण ४१६ | चतुर्थ वंग मारण ४४१
ताम्रभस्म का गुण ,, | क्षार शून्य की परीक्षा ४४२
विशेष गुण ४२२ | पञ्चम मारण ,,
ताम्र भस्म की मात्रा ,, | वंग भस्म का गुण ४४३
ताम्र भस्म का आमयिक प्रयोग ,, | विशेष गुण ४४४
रविताण्डव रस ४२६ | वंग भस्म के शीत उष्ण होने
हृदयार्णव रस ४३० | में हेतु ४४५
त्र्यम्बकेश्वर रस ,, | वंग भस्म की मात्रा ,,
सूर्यावर्त रस ४३१ | वंग भस्म का आमयिक प्रयोग ४४६
शूलेभकेशरी रस ४३२ | स्वर्ण वंग का मारण ४४८
भूनाग सत्व पातन ४३३ | द्वितीय मारण प्रकार ४५१
भूनाग सत्व मारण ४३३ | स्वर्ण वङ्ग का गुण ,,
भूनाग सत्व का गुण ४३४ | स्वर्ण वंग की मात्रा ४५२