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सर्वकोश
रसार्णव (शैव रस-तन्त्र - प्राचीन भारतीय खनिज रसायन, धातुवाद एवं रस-चिकित्सा सटीक)

रसार्णव (शैव रस-तन्त्र - प्राचीन भारतीय खनिज रसायन, धातुवाद एवं रस-चिकित्सा सटीक)

Rasarnava: Tantric Chemistry and Alchemy with Commentary

शिव-पार्वती संवाद (सम्पादक: प्रफुल्लचन्द्र राय एवं हरीशचन्द्र कविराज) द्वारा

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५४ रसार्णवे
भस्त्रया१ ज्वालमार्गेण ज्वालयेच्च हुताशनम् ॥ ५७ ॥
प्रविततमुखभागं संहतान्तःप्रदेशं२
स्थलरचितचिरान्तर्जालकं कोष्ठकं स्यात् ।३
वकगलससमानं४ वङ्कनालं विधेयं५
शुषिरनलिनिका स्यान्मृन्मयो दीर्घवृत्ता७ ॥ ५८ ॥
मृन्मये लोहपात्रे वा८ अयस्कान्तमयेऽथवा ।
पाषाणे स्फटिके वाथ मुक्ताशैलमयेऽथवा ॥ ५९ ॥
सुदृढो मर्दकः कार्यः९ चतुरङ्गुलकोच्छ्रयः१० ।
(१) मातया is the reading in अवि. (२) प्राशवत्तन्मुखाभागात् संहतान्तः-
प्रदेशतः, a variant in K, which is inc. B and M read प्रविततमुखभागः
संहतान्तःप्रदेशः, whereas they state कोष्ठक (neuter). (३) स्थलरचितविदातां-
पावकं कोष्ठकस्य तु, a variant in K, which has no sense, neither metre.
M reads चितान्तर्जालकं. (४) वंकगलसमान च, a reading in K, which
is not correct. M reads वकगगलसमान, wherein वकग has no meaning.
(५) B reads वकनाल. K reads विधारयेत्, which mars the metre. (६) B
reads शुषिरनलिकांवा. शिशून् वरनलिकास्था, a variant in K, which is a
palpable error. शुषिरनलिनकाढश, a variant in M. [शुषिर = सच्छिद्र, नलि-
निका = नली, नाल.] (७) K reads दीर्घवृत्तया, which is incorrect. M
reads दीर्घवृत्वा, the meaning whereof is not intelligible. (८) K reads
च. M reads मण्यर्थंलाहपात्रे वा, which seems to be incorrect. (९) B
and K read मईकं कार्य. M reads कार्यो, which is incorrect. रसरत्नसमुच्चय
has the term मर्दकः in the masculine gender. (Chap. IX. v. 87.) We
have adopted that reading. (१०) चतुरङ्गुलकोटियः, a variant in K.
चतुरङ्गुलगोथियः, a reading in M. Both are unintelligible.