रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)
Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation
रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंबालकांड ६९
राजकुमारो ने अपने आगमन का समाचार अपने नाना को भेज दिया । उस राजा ने
अपने नगर को फूल-मालाओ, तोरणो तथा पताकाओ से सुदर ढग से सजाया । सुगंधित
जल से मार्गों का सिंचन करवाया तथा पुष्प एव धूप आदि से राजमार्ग को सुगधित किया ।
(फिर) मत्रियो, स्त्रियो तथा परिचारको को साथ लेकर तरह-तरह के वाद्य,
नृत्य, गीतो से युक्त हो राजा ने उनकी अगवानी की और वदी, सूत तथा मागध-जन की
स्तुति-वचनो के साथ अपने नाती को बडे स्नेह से अत पुर में ले आये । भरत ने अपने
नाना से लेकर क्रमश सभी गुरुजनो को प्रणाम किया और उनके आशीर्वाद प्राप्त किये ।
युवराज राम बडी कुशलता तथा एकाग्रता से, अपने पिता की सेवा करते हुए,
भी प्रजा को एक समान मानते हुए धर्म-निरत हो, सीता के साथ नव-वैवाहिक जीवन का
आनन्द प्राप्त करने लगे । वे अट्टालिकाओ पर, क्रीडा-सौधो में, चन्द्रकान्त शिलाओ पर, शीश-
महलो में, सोने के शयनागारो में, जूही की पुष्प-शय्याओ पर, चपक, पूग, नारियल, रसाल,
नारगी आदि वृक्षो से युक्त उपवनो में, क्रीडा-पर्वतो पर, सरोवरों में, लतागृहो में, धवल
वितानो में, बालुकामय भूमि पर, आमोद-प्रमोद के साथ रहते हुए, समस्त सुख-भोगो का
अनुभव करते रहे ।
इस प्रकार, आन्ध्र के भाषा-सम्राट्, काव्य तथा आगमो के ज्ञाता, आचारवान्, अपार
ज्ञान-समुद्र, भूलोक के लिए निधि-सम दीखनेवाले गोनबुद्ध राजाने अपने पिताश्रेष्ठ, धैर्यवा,न्
शत्रुओ के लिए काल-स्वरूप, महापुरुष, श्रेष्ठ शूर, दयालु, गुणवान् विट्ठलराजा के
नाम, आचन्द्रार्क विलसित होनेवाली, समस्त भूमडल में अत्यत पूज्य, अनुपम, ललित शब्दार्थों
से युक्त रस-सिद्ध रामायण के कला एव भावो से परिपूर्ण बालकाड की रचना की ।
आर्षग्रन्थ, आदि काव्य, रसिको को आनद देनेवाले तथा शाश्वत, इस पुण्यचरित्र
को जो कोई पढेंगे या सुनेंगे, वे सामादि वेद-समूहों का निवास-स्थान, रामनाम चिंता-
मणि, समस्त भोग, परहित आचरण, ऊँचे विचार, पूर्ण शक्ति, राज-सुख, विमल यश, चिर
सुख, धर्म-निष्ठा, दान में आसक्ति, चिरायु, स्वास्थ्य, समृद्धि आदि अवश्य ही प्राप्त करेंगे ।
उनके पापो का नाश होगा, पुत्र की प्राप्ति होगी, शत्रुओ का नाश होगा और धन-धान्य की
वृद्धि होगी । विना किसी प्रकार के विघ्न-बाधाओ के, उन्हें लावण्यवती धर्म-पत्नी का सह-
वास प्राप्त होगा । उनके भाई भी उन्नति प्राप्त करते हुए बडे स्नेह से हिल-मिलकर रहेंगे ।
देवता तथा पितर सदा तृप्त रहेंगे । यह रामायण मोक्ष-साधक है, पापहारी है,
दिव्य तथा भव्य है । शुभप्रद है । इस रामायण की पूजा नियम-पूर्वक करने से पुण्य प्राप्त होगा,
इसकी रचना करनेवालो की शुभ उन्नति होगी और स्वर्ग-लोक का निवास प्राप्त होगा ।
जबतक कुल पर्वत, समुद्र, रवि-चन्द्र, नक्षत्र, वेद, दिशाएँ तथा ससार शोभायमान रहेंगे,
तबतक यह कथा शाश्वत आनद-समूह का निवास-स्थान बनी रहेगी ।
. बालकांड समाप्त :