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रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)

रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)

Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation

रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा

DevanagariHindipublished508 पृष्ठ

पृष्ठ 359, कुल 508 में से

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पृष्ठ 359

मुकुटों को पैरों से कुचलने लगा । उसने एक मुकुट को दूसरे मुकुट पर फेंका, एक मुकुट
पर से दूसरे मुकुट को गिराया, एक मुकुट से दूसरे मुकुट पर पद-प्रहार करके सभी मुकुटों
को मिट्टी में मिला दिया । इससे संतुष्ट न होकर, वह सूक्ष्म रूप में रहनेवाले अपने को
पकड़ने में रावण को असफल होते देखकर, हँसने लगा । फिर उसने रावण के छत्र फाटकर
फेंक दिये, उसके चामरों को नष्ट-भ्रष्ट कर दिया, रथ पर प्रहार करके उसको खंड-खंड
कर दिया, क्रूरता के साथ दानवेश्वर की मुष्टि पर पद-प्रहार किया, उसके हारों को खींच-
कर फेंक दिया और उसके विशाल वक्ष पर प्रहार करने लगा । इस प्रकार, बड़े उत्साह
से युद्ध करनेवाले उस नील को देखकर राक्षस तथा वानर-सेनाएँ आश्चर्यचकित हो गईं ।
राम तथा लक्ष्मण भी विस्मित हुए । तब रावण अत्यन्त क्रोध से महान् अग्नि-बाण को
अपने धनुष पर चढ़ाकर उस अग्नि-पुत्र (नील) से कहा—'बलिहारी है तुम्हारे लाघव की।
मैं तुम्हारी प्रशंसा करता हूँ । तुम अपनी लघुता ही मुझे दिखाते रहो । अब यह लो,
अग्नि-बाण अपनी ज्वालाओं का प्रकाश फैलाता हुआ चला । इससे बचने का उपाय करो।'
यों कहते हुए उसने बाण चलाया । अग्नि-बाण के प्रभाव से नील का सारा शरीर जलने
लगा और वह पृथ्वी पर गिर पड़ा । अग्नि-पुत्र होने के कारण उसकी