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रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)

रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)

Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation

रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा

DevanagariHindipublished508 पृष्ठ

पृष्ठ 33, कुल 508 में से

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पृष्ठ 33

१. देव-स्तुति
चरित रघुनाथस्य शतकोटिप्रविस्तर ।
एकैकमक्षर प्रोक्त महापातकनाशनम् ॥
रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे,
रघुनाथाय नाथाय सीताया पतये नम ॥
श्रीलक्ष्मीनाथ, दैत्य-विजयी, लोक-रक्षक, नित्य, सदानंद, मोक्षदायक, कर्म-रहित, सृष्टि
के स्वयंभूत आधार, हृदय-कमल में स्थित भक्ति-रूपी आनन्द को व्यक्त करने के साधन-क्रम में
तत्पर भूमर-रूपी भगवान्, गजराज को मोक्ष प्रदान करनेवाले, अपने आश्रित-लोक के वंधु,
मसार के बंधनो से मुक्ति देनेवाले, वलि को बाँधने का दृढ़ सकल्प करनेवाले, प्रणव-रूप,
गोपिकाओ के हृदय में विहार करनेवाले, अबोध-गम्य आकारवाले, निराकार, योगियो के
हृदय में ओंकार-रूप में वर्त्तमान, योगिसदर्शित, मोक्ष-प्रचारक, श्रुतियो के शिरोमणि, विशुद्ध-चैतन्य
स्वरूप, अतिलोकवासी, समस्त लोको का आश्रय, ब्रह्माण्डरूपी मुक्ता का आयतन, नित्याधार,
अखिल तत्त्वातीत, आदि-अन्त-रहित, पवित्रात्मा, अविनाशी, वेद-रूपी कमल के लिए सूर्य,
अक्षीण कल्याणो का आधार, निश्शंक मन से सद्भक्ति तथा सेवा करनेवाले भक्तो के लिए
दया-सिंधु, करुणा-सिंधु, बोधक, बोध्य तथा बोध—इन तीनो में व्यक्त होनेवाले पूर्ण-रूप,