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रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)

रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)

Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation

रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा

DevanagariHindipublished508 पृष्ठ

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पृष्ठ 307

युद्धकांड २७७
तपस्या की महिमा से इसको एक ऐसा वर दिया कि तृण से लेकर कोई भी वस्तु, जिसे
यह वालक समुद्र में फेंकेगा, वह जल के ऊपर ही तैरने लगेगी । इस वरदान के फल-स्वरूप
उस मुनि की देव-मूर्त्तियाँ जल के ऊपर तैरने लगीं ! यही कारण है कि इसके हाथो से
फेंके जाने पर पहाड़ भी जल पर तैरने लगेंगे । इस प्रकार मेरे जल पर सेतु बँध जायगा।
हे धरणीश, आप शीघ्र ही नल को वुला भेजिए ।'
२६. सेतु-बन्धन
तब रघुकुलोत्तम राम ने नल को वुलाया और वड़े आदर के साथ उसे देखकर
वोले—'हे वानरवीर, हे धीर, समुद्र ने तुम्हारे पराक्रम का वृत्तात मुझे सुनाया है ।
अव तुम अपने शौर्य का प्रदर्शन करते हुए समुद्र पर मेतु वाँधने में दत्तचित्त हो जाओ ।'
राम का आदेश सुनकर उसने हाथ जोडकर राम भूपाल से कहा—'हे देव, इस ससार में
जन्म लेने का फल आज मुझे प्राप्त हुआ । आप मुझे आज्ञा दीजिए । मैने अपने पिता से
सेतु वाँधने की कला जान ली है । मै अपनी निपुणता का