रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)
Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation
रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा
पृष्ठ 276, कुल 508 में से
संदर्भ में पढ़ेंनिधि, गोनवुद्ध भूपाल ने सुदर गुणो से सपन्न, धैर्यवान्, शत्रुओ के लिए भयंकर स्वरूप, महात्मा,
अपने पिता विट्ठल-नरेश के नाम पर रसिक जनो के लिए प्रिय, अनुपम तथा ललित शब्द
तथा अर्थों से सपन्न रामायण के इस सुदरकाड की, श्रेष्ठ अलंकार तथा सुंदर भावो से
परिपूर्ण वनाकर इस प्रकार रचना की कि वह आचन्द्रार्क, परमपूज्य हो शोभायमान होता रहे।
प्रसिद्धं, आर्ष, रसिको के लिए सतत आनंददायक इस आदिकाव्य का पठन जो कोई
भी करेगा, या जो इसका श्रवण करेगा, उसे सामवेद आदि विविध वेदो का आधार राम-
नाम-रूपी चिंतामणि के द्वारा नये भोग, परोपकार-वुद्धि, उदात्त विचार, परिपूर्ण शक्ति,
राज्य-सुख, निर्मलकीर्त्ति, नित्य सुख, धर्मनिष्ठा, दान-पुण्य में अनुरक्ति, चिरायु, स्वास्थ्य,
ऐश्वर्य, अक्षय शुभ, पाप-क्षय, श्रेष्ठ पुत्र की प्राप्ति, शत्रुओ का नाश, और धन-धान्य-समृद्धि, आदि
सुलभ होगे । उनका जीवन निर्विघ्न होगा, घरो में लावण्यवती स्त्रियो का अनुराग तथा
पुत्रो के साथ जीवन सिद्ध होगा । सव प्रकार के सकट दूर होगे, सगे-संवधियो से मिलन,
इच्छित कार्यों की सिद्धि, देवताओ की प्रीति, और पितरो की तृप्ति सुलभ होगी । इसके
रचयिता की श्रेष्ठ तथा शुभ उन्नति होगी तथा उसे इन्द्रभोग की प्राप्ति होगी । जवतक
कुलपर्वत, सूर्य, चंद्र, दिशाएँ, वेद, पृथ्वी, तथा सभी भुवन सुशोभित रहेंगे, तवतक यह
कथा अक्षय आनंद-समूह का आगार सिद्ध होगी ।
सुन्दरकांड समाप्त