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रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)

रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)

Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation

रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा

DevanagariHindipublished508 पृष्ठ

पृष्ठ 243, कुल 508 में से

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पृष्ठ 243

१. हनुमान् का लंका में प्रवेश
श्रीराम का कार्य सपन्न करने का निश्चय करके हनुमान् ने विशाल सागर को
ऐसा पार किया, मानो वह एक छोटी-सी नहर हो और उस सुवेल पर्वत पर चढ गया,
जो लकापुरी के 'निकट था । वह लकापुरी सुदर शृंगोसे, पहाडी तराइयो से, प्रचुर वृक्षो
तथा लता-समूहो से, कैरव, बधूक, कल्हार एव कुमुद आदि पुप्पो से, सारस आदि 'जलचर
पक्षियो से, विलास गति से विहरण करनेवाले हसो के कलरव से, क्रौंच पक्षियो के निनादो
सै तथा कमल का मकरद पान करने से मत्त होकर झकार करनेवाले भ्रमरो की पक्तियो
सं युक्त तडागो से परिपूर्ण था ।
उस पर्वत पर चढकर हनुमान् ने दक्षिण दिशा में दृष्टि दौडाई और लका नगरी
को देखा । वह नगरी त्रिकूटाद्रि पर सुशोभित थी, और धर्म, अर्थ तथा काम इन तीनो
को एकत्र किये बैठी लक्ष्मी के समान सुशोभित थी । अपनी उज्ज्वल कान्ति के कारण
वह ताराद्रि की समता करती थी और आकाश-मार्ग से स्पर्धा करती हुई दिखाई पडती थी ।
वह अपने रत्नो की कान्ति से सुशोभित होकर ऐसी दीखती थी, मानो देवताओ से
युक्त अमरावती ही समुद्र के मध्य में सुदर ढग से शोभायमान हो रही हो । अथवा सुदर