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रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)

रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)

Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation

रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा

DevanagariHindipublished508 पृष्ठ

पृष्ठ 240, कुल 508 में से

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पृष्ठ 240

२६० रंगनाथ रामायण
वढा दिया । तव हनुमान् ने वडी चतुरता से एक अगुष्ठ प्रमाण-मात्र का अपना शरीर
वनाकर, सूक्ष्म रूप से उस स्त्री के मुँह में प्रवेश करके सहज हीं इस प्रकार वाहर निकल
आया जैसे कोई ज्ञानी ससार के जटिल वधनो से अपने-आपको मुक्त करकें निकल आता है ।
उसके पश्चात् उसने उस स्त्री को देखकर कहा—'हे नारी, मैने तुम्हारी इच्छा पूरी
कर दी, अव मे समुद्र पार जाऊँगा ।' उस स्त्री ने भी उस कपिकुलोत्तम हनुमान् की
वुद्धि की प्रशसा करती हुई दिव्य रूप धारण करके वड़े स्नेह से आशीर्वाद दिया और कहा-
'शीघ्र ही तुम्हारा कार्य सिद्ध हो ।'
तव हनुमान् समझ गया कि यह छायांग्राहिणी है और बिना भय के तुरत सूक्ष्म
रूप धारण करके उसके उदर में प्रवेश किया । फिर उसने उसका उदर चीरकर उस दुष्ट
राक्षसी को समुद्र में फेंक दिया । इन्द्रादि देवता इसे देखकर अत्यत हर्षित हुए और पुष्प-
वृष्टि करने लगे । इस प्रकार हनुमान् सहज ही समुद्र पार करके सुवेल (त्रिकूट) पर्वत
पर पहुँच गया ।
इस प्रकार, आन्ध