रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)
Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation
रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१. पंपासर-दर्शन
श्रीराम ने तब शीतल जल तथा कमल, उत्पल एव कुमुदो से सुशोभित पपा सरोवर
को और उसके तटवर्त्ती, वसत ऋतु के कारण, फूल और फल के भार से युक्त चपक तथा
सहकार वृक्षो की शोभा को देखकर जानकी के विरह से कपित होते हुए लक्ष्मण से कहा—
“हे सौमित्र, यह पपा सरोवर इतना मनोहर है कि यह देवताओ की कामिनियो के लिए
भी जल-क्रीडा करने की इच्छा करने योग्य है । इस सरोवर की समता करनेवाला कोई
दूसरा सरोवर वताना, क्या शेषनाग के लिए भी सभव हो सकता है ? इसका महत्त्व
जानने के पश्चात् क्या मानसरोवर भी तुच्छ नही प्रतीत होगा ? पवित्र जीवन का आधार
इस सरोवर की समता, क्या स्वर्गलोक का कोई भी जलाशय कर सकता है ? (जल के)
वाहर निकले हुए मृणालो के ऊपर दीखनेवाली कर्णिकाओ पर (बीजकोष) विकसित श्वेत
कमल, मरकत के स्तम्भो पर स्थित स्वर्ण-कलशो पर आधारित छत्रो की भाँति दीखते हैं ।
दोनो पार्श्वभागो में भ्रमरो के पखो से उत्पन्न शीतल वायु के कारण तरगायमान होनेवाली
लहरो पर डोलनेवाले राजहसो के फैलाये हुए पख चामरो की भाँति सुशोभित हैं ।
इनके कारण यह सरोवर शोभा-रूपी साम्राज्य के लिए अभिषिक्त सा अत्यत मनोहर दीख
रहा है । वसतकाल के समान यौवन की काति से परिपूर्ण हो, छोटे-छोटे पल्लव-रूपी