रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)
Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation
रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१ राम-राज्याभिषेक का संकल्प
महाराजा दशरथ अत्यन्त शुभप्रद रीति से राज्य का पालन करते थे । एक दिन
उन्होंने विचार किया, 'मेरा पुत्र राम, मेरे चारो पुत्रो में शुभ-गुणसपन्न, अतुल यशस्वी,
सदा दीन-दुखियो की चिन्ता करनेवाला, परहित का विचार करनेवाला, समस्त प्राणियो पर
दया दिखानेवाला, चारो पुरुषार्थो की सिद्धि के लिए यत्न करनेवाला, सतत सन्तुष्ट, प्रशंसा-
के योग्य गुणो से युक्त उचित क्रोध तथा प्रसाद गुणो से पूर्ण, शासन-शक्ति से समन्वित,
गज-तुरग आदि के आरोहण में दक्ष, विजयलक्ष्मी से समन्वित, चतुर, इच्छित कार्यों को
अविलंब सपन्न करनेवाला, दीर्घ कोप से रहित, सेवको पर कृपा रखनेवाला, अतिरथी,
ईर्ष्यारहित, करुणा-सिंधु, दूसरो के अच्छे-गुणो का आदर करनेवाला, बुद्धि में वृहस्पति को
भी परास्त करनेवाला, शुद्ध तेज में सूर्य के सदृश दीखनेवाला, प्रजारंजक, चन्द्र के समान-
शोभायमान, धनुर्वेद तथा वेदशास्त्रो में पारगत, न्याय के मार्ग से ही धनार्जन करने में निपुण,
क्षमा में पृथ्वी के समान ओर सकल-सद्गुण-सपन्न है। उसका राज-तिलक कर देना चाहिए।'
ऐसा विचार करके उन्होंने वसिष्ठादि महामुनि, सुमंत्र आदि सचिव, पास-पडोस के राजा,
मित्र, वधु, नागरिक, जनपद के लोग, आश्रित, बुद्धिमान्, सामत राजा, योद्धा, राजनीतिज्ञ