रामप्रसाद 'बिस्मिल' की आत्मकथा (काकोरी के अमर शहीद की जेल डायरी व आत्मकथा)
Autobiography of Ram Prasad Bismil
पं. रामप्रसाद 'बिस्मिल' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
Uploaded By Rajesh Tanti.
शब्दार्थ एवं टिप्पणियाँ 115
भावार्थ अब मैं मृत्यु के झोंके अनुभव करने लगा हूँ। यानि मुझ पर जीवन का
रहस्य खुलने लगा है। मैंने भरपूर गम भी देखा है और भरपूर खुशी भी। जो मैं अन्दर
से सुन्न होकर रह गया हूँ यह कोई अकारण घटना नहीं है। निष्ठा को दिल की बलि
चढ़ा दे और जीवन को प्रेमिका के अत्याचारों की भेंट चढ़ा दे क्योंकि प्यार में यह
आवश्यक है कि प्रेमी के पास जो कुछ भी है उसे वह लुटा दे।
37. बहरे समुद्र
38. फना मृत्यु
39. रब ईश्वर
40. बिस्मिल यह कवि का उपनाम है
41. जौहरे शमशीर तलवार की वीरता
42. क़ातिल हत्यारा
43. दाग़े नाकामी असफलता का चिह्न
भावार्थ : हे ईश्वर बिस्मिल की लाश को मृत्यु के सागर में जल्दी बहा दे क्योंकि
मेरी प्रेमिका की तलवार की वीरता मेरी लहू की प्यासी है। ऐ मेरी असफलता के दाग
मेरे दिल को सोच समझ कर फूंकना क्योंकि यह बुरी तरह उजड़ चुका है, फिर भी
इसमें अनेक इच्छायें सांस ले रही हैं। यहाँ प्रेमिका का प्रयोग देश की स्वतंत्रता के लिए
किया गया है।
हिन्दी शब्द अर्थ
44. सहस्रों हजारों
45. निज अपने
46. ईश ईश्वर
47. शत सौ
48. देशोपकारक देश की भलाई के लिए
भावार्थ : यदि देश की भलाई के लिए मुझे हजारों बार मरना पड़े तब भी मैं मृत्यु.
के इस कष्ट पर कभी ध्यान न दूँ। हे ईश्वर मेरा अपने देश भारत में ही जन्म
बार-बार हो और मैं हर बार अपने देश की भलाई के लिए ही अपने प्राण दूँ।
टिप्पणी : शहीद रामप्रसाद बिस्मिल की भगवान से यह प्रार्थना सिद्ध करती है कि
वह महान देशप्रेमी थे। वह देश की स्वतंत्रता व भलाई के लिए एक बार नहीं हजारों
बार जन्म लेना और हजारों बार मरना चाहते थे। रामप्रसाद बिस्मिल की तरह मदन
लाल धींगरा आदि अनेक भारतीय क्रांतिकारियों ने जेलों, अदालतों या फाँसी के तख्तों
116 रामप्रसाद बिस्मिल की आत्मकथा
पर इस अनुपम और आदर्श देशप्रेम व बलिदान की भावनाओं को अभिव्यक्त किया
था। ऐसे देशप्रेमी स्वाधीनता सेनानियों के संघर्षों व बलिदानों से ही हमारा प्यारा देश
भारत स्वतंत्र हुआ। भारत के हर नागरिक को अपने हृदय में देशप्रेम व देशसेवा की
भावनाएँ भरनी चाहिए। हम अपने देश की सुरक्षा करके, उसकी एकता को कायम रख
कर और धर्म, सम्प्रदाय या जाति का कोई भेदभाव किए बिना देश की समस्त जनता
की भलाई के लिए कार्य करके ही ऐसा कर सकते हैं।
49. टिप्पणी : शहीद रामप्रसाद बिस्मिल ने अपने प्रिय साथी शहीद अशफाकउल्ला के
कार्यों पर गर्व प्रकट करते हुए देशवासियों से अपील की है कि सभी धर्मों व
संप्रदायों के लोग भेदभाव छोड़ कर और एक होकर देश की स्वतंत्रता के लिए
कार्य करें। वह साईमन कमीशन के विरोध में देश में प्रदर्शित की गई एकता को
आशा भरी निगाहों से देखते हैं और 1927 में मद्रास में होने वाले कांग्रेस के
अधिवेशन से भी आशा रखते हैं।
50. टिप्पणी : रामप्रसाद बिस्मिल के क्रांतिकारी साथियों भगत सिंह, चन्द्रशेखर आजाद,
शिव वर्मा आदि ने गुप्त रूप से उन्हें गोरखपुर जेल से भगा ले जाने का प्रयास
किया था परंतु यह प्रयास सफल नहीं हो सका। रामप्रसाद बिस्मिल को जेल में
इस बात की सूचना नहीं मिल पाई थी कि उनके साथी उन्हें जेल से भगा ले
जाने का प्रयास कर रहे हैं।
51. टिप्पणी : शहीद रामप्रसाद बिस्मिल क्रांतिकारी आंदोलन के अपने अनुभवों के
आधार पर देश के नौजवानों को सलाह देते हैं कि वे बम व पिस्तौल से
व्यक्तिगत हत्याएँ करने का मार्ग छोड़ कर पहले जनता को शिक्षित व संगठित करें
और देश की स्वतंत्रता के लिए खुले जन आंदोलनों में शामिल हों। रामप्रसाद
बिस्मिल की तरह रासबिहारी बोस, शचीन्द्र नाथ सान्याल, भगत सिंह तथा अनेक
अन्य क्रांतिकारियों ने जेलों में गहन अध्ययन करके खुले आंदोलन की महत्ता को
स्वीकार किया था। भगतसिंह-युग गुप्त आंदोलन से खुले आंदोलन में संचरण का
युग था। इस अवधि में क्रांतिकारी व्यक्तिगत हत्याओं की रणनीति पूरी तरह छोड़
तो नहीं पाए थे परंतु वे जन आंदोलन; जन संगठन, जन संघर्ष और समाजवाद की
विचारधारा स्वीकार करने की ओर बढ़ रहे थे। ये 'टेरो-सोशलिज्म' (आतंकवाद
समर्थित समाजवाद) की विचारधारा अपनाए हुए थे।