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रामप्रसाद 'बिस्मिल' की आत्मकथा (काकोरी के अमर शहीद की जेल डायरी व आत्मकथा)

रामप्रसाद 'बिस्मिल' की आत्मकथा (काकोरी के अमर शहीद की जेल डायरी व आत्मकथा)

Autobiography of Ram Prasad Bismil

पं. रामप्रसाद 'बिस्मिल' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished128 पृष्ठ

पृष्ठ 90, कुल 128 में से

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पृष्ठ 90

78 रामप्रसाद बिस्मिल की आत्मकथा
छत्तीस व्यक्ति गिरफ्तार हुए थे। अट्ठाईस
पर मजिस्ट्रेट की अदालत में मुकदमा चला।
तीन व्यक्ति- श्री शचीन्द्रनाथ बख्शी, श्री
चन्द्रशेखर आज़ाद और श्री अशफाकउल्ला
खाँ फरार रहे। बाकी सब मुकदमा अदालत
में आने से पहले छोड़ दिए गए। अट्ठाईस
में दो पर से मजिस्ट्रेट की अदालत में
मुकदमा उठा लिया गया। दो को सरकारी
गवाह बनाकर उन्हें माफी दी गई। अंत में
मजिस्ट्रेट ने इक्कीस व्यक्तियों को सेशन
के सुपुर्द किया। सेशन में मुकदमा आने
योगेशचन्द्र चटर्जी
पर श्री दामोदरस्वरूप सेठ बहुत बीमार हो
गए। अदालत न आ सकते थे, अतः अंत
में बीस व्यक्ति रह गए। बीस में से दो
व्यक्ति श्री शचीन्द्रनाथ विश्वास तथा श्री
हरगोविंद सेशन की अदालत में मुक्त हुए।
बाकी अठारह को सजाएँ हुईं।
श्री बनवारीलाल इकबाली मुलजिम हो
गए। वे रायबरेली जिला कांग्रेस कमेटी के
मंत्री भी रह चुके थे। उन्होंने असहयोग
आंदोलन में छः मास का कारावास भी
भोगा था। इस पर भी पुलिस की धमकी से
प्राण संकट में पड़ गए। आप ही हमारी
समिति के ऐसे सदस्य थे कि जिन पर
समिति का सबसे अधिक धन व्यय किया
शचीन्द्रनाथ बख्शी