रामप्रसाद 'बिस्मिल' की आत्मकथा (काकोरी के अमर शहीद की जेल डायरी व आत्मकथा)
Autobiography of Ram Prasad Bismil
पं. रामप्रसाद 'बिस्मिल' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
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राजद्रोहात्मक साहित्य पकड़ा गया। इसी मकान में श्री राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी, जो इस
मुकदमे में फरार थे, गिरफ्तार हुए।
इंदुभूषण के गिरफ्तार हो जाने के
बाद उसके हैडमास्टर को एक पत्र मध्य
प्रांत से मिला, जिसे उसने हार्टन साहब
के पास वैसा ही भेज दिया। इस पत्र से
एक व्यक्ति मोहन लाल खत्री का चाँदा
में पता चला। वहाँ से पुलिस ने खोज
लगाकर पूना में श्री रामकृष्ण खत्री को
गिरफ्तार करके लखनऊ भेजा। बनारस में
भेजे हुए पार्सलों के संबंध से जबलपुर में
श्री प्रणवेशकुमार चटर्जी को गिरफ्तार करके
भेजा गया। कलकत्ता से श्री शचीन्द्रनाथ
सान्याल, जिन्हें बनारस षड्यंत्र से आजन्म
कालेपानी की सजा हुई थी, और जिन्हें
बांकुरा में "क्रांतिकारी" पर्चे बाँटने के कारण
दो वर्ष की सजा हुई थी, इस मुकदमे में
लखनऊ भेजे गए। श्री योगेशचन्द्र चटर्जी
बंगाल आर्डिनेंस के कैदी हजारी बाग जेल
से भेजे गए। आप अक्तूबर सन् 1924 ई.
में कलकत्ते में गिरफ्तार हुए थे। आपके
[चित्र-शीर्षक]: शचीन्द्रनाथ सान्याल
पास दो कागज पाए गए थे, जिनमें संयुक्त प्रांत के सब जिलों का नाम था, और
लिखा था कि बाईस ज़िलों में समिति का कार्य हो रहा है। ये कागज इस षड्यंत्र
के संबंध के समझे गए। श्री राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी दक्षिणेश्वर बम केस में दस वर्ष
के दीपांतर की सजा पाने के बाद इस मुकदमे में लखनऊ भेजे गए। अब लगभग