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रामप्रसाद 'बिस्मिल' की आत्मकथा (काकोरी के अमर शहीद की जेल डायरी व आत्मकथा)

रामप्रसाद 'बिस्मिल' की आत्मकथा (काकोरी के अमर शहीद की जेल डायरी व आत्मकथा)

Autobiography of Ram Prasad Bismil

पं. रामप्रसाद 'बिस्मिल' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished128 पृष्ठ

पृष्ठ 64, कुल 128 में से

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पृष्ठ 64

52 रामप्रसाद बिस्मिल की आत्मकथा
मिलाकर एक प्लेट में सादे कागज पानी में भिगोए। मैं जो साफ़ नोट लाया था,
उस पर एक सादा कागज लगाकर दोनों को दूसरी दवा डालकर धोया। फिर दो
सादे कागजों में लपेट एक पुड़िया-सी बनाई और अपने एक साथी को दी कि
उसे आग पर गरम कर लाए। आग वहाँ से कुछ दूर पर जलती थी। कुछ समय
तक वह आग पर गरम करता रहा और पुड़िया लाकर वापस दे दी। नोट बनाने
वाले ने पुड़िया खोलकर दोनों शीशों में दबाकर शीशों को दवा में धोया और
फीते से शीशों को बाँधकर रख दिया और कहा कि दो घंटे में नोट बन जाएगा।
शीशे रख दिए। बातचीत होने लगी। कहने लगा, "इस प्रयोग में बड़ा व्यय होता
है। छोटे-छोटे नोट बनाने से कोई लाभ नहीं। बड़े नोट बनाने चाहिए, जिससे
पर्याप्त धन की प्राप्ति हो।" इस प्रकार मुझे भी सिखा देने का वचन दिया। मुझे
कुछ कार्य था। मैं जाने लगा तो वह भी चला गया। दो घंटे के बाद आने का
निश्चय हुआ।
मैं विचारने लगा कि किस प्रकार एक नोट के ऊपर दूसरा सादा कागज
रखने से नोट बन जाएगा। मैंने प्रेस का काम सीखा था। थोड़ी बहुत फ़ोटोग्राफी
भी जानता था। साइंस (विज्ञान) का भी अध्ययन किया था। कुछ समझ में न
आया कि नोट सीधा कैसे छपेगा। सबसे बड़ी बात यह थी कि नंबर कैसे छपेंगे।
मुझे बड़ा भारी संदेह हुआ। दो घंटे बाद मैं जब गया तो रिवाल्वर भरकर जेब में
डालकर ले गया। यथासमय वह महाशय आए। उन्होंने शीशे खोलकर कागज
निकालकर उन्हें फिर एक दवा से धोया। अब दोनों कागज खोले। एक मेरा
लाया हुआ नोट और दूसरा एक दस रुपये का नोट उसी के ऊपर से उतारकर
सुखाया। कहा- "कितना साफ़ नोट है।" मैंने हाथ में लेकर देखा। दोनों नोटों
के नंबर मिलाए। नंबर नितांत भिन्न-भिन्न थे। मैंने जेब से रिवाल्वर निकाल नोट
बनाने वाले महाशय की छाती पर रख, कहा, "बदमाश ! इस तरह ठगता फिरता
है ?" वह काँपकर गिर पड़ा ! मैंने उसको उसकी मूर्खता समझाई कि यह ढोंग
गाँववासियों के सामने चल सकता है, अनजान पढ़े-लिखे भी धोखे में आ सकते
हैं। किन्तु तू मुझे धोखा देने आया है। अंत में मैंने उससे प्रतिज्ञा-पत्र लिखाकर,