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रामप्रसाद 'बिस्मिल' की आत्मकथा (काकोरी के अमर शहीद की जेल डायरी व आत्मकथा)

रामप्रसाद 'बिस्मिल' की आत्मकथा (काकोरी के अमर शहीद की जेल डायरी व आत्मकथा)

Autobiography of Ram Prasad Bismil

पं. रामप्रसाद 'बिस्मिल' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished128 पृष्ठ

पृष्ठ 120, कुल 128 में से

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पृष्ठ 120

Uploaded By Rajesh Tanti.

108 रामप्रसाद बिस्मिल की आत्मकथा

कि लार्ड बर्कन हेड के दिमाग में परमात्मा ने एक विचार उपस्थित किया कि
हिन्दुस्तान के हिन्दू-मुस्लिम झगड़ों का लाभ उठाओ और भारत की जंजीरें और
कस दो। गए थे रोजा छोड़ने नमाज गले पड़ गई। भारत के प्रत्येक विख्यात
राजनैतिक दल ने और हिंदुओं के तो लगभग सभी तथा मुसलमानों के भी
अधिकतर नेताओं ने एक स्वर होकर रायल कमीशन (साइमन कमीशन) की
नियुक्ति तथा उसके सदस्यों के विरुद्ध घोर विरोध किया है, और कांग्रेस के मद्रास
में होने वाले अधिवेशन में सब राजनैतिक दल के नेता तथा हिन्दू-मुसलमान एक
होने जा रहे हैं। वाइसराय ने जब हम काकोरी के मृत्यु-दंड वालों की दया-प्रार्थना
अस्वीकार की थी, उसी समय मैंने श्री मोहनलाल जी को पत्र लिखा था कि
हिन्दुस्तानी नेताओं को तथा हिन्दू-मुसलमानों को अगली कांग्रेस (अधिवेशन) पर
एकत्रित हो हम लोगों की याद मनानी चाहिए। सरकार ने अशफाकउल्ला को
रामप्रसाद का दाहिना हाथ करार दिया। अशफाकउल्ला कट्टर मुसलमान होकर
पक्के आर्यसमाजी रामप्रसाद का क्रांतिकारी दल के संबंध में यदि दाहिना हाथ बन
सकते हैं, तब क्या भारत की स्वतंत्रता के नाम पर हिन्दू-मुसलमान अपने निजी
छोटे-छोटे फायदों का ख्याल न करके आपस में एक नहीं हो सकते?⁻⁴⁹
परमात्मा ने मेरी पुकार सुन ली और मेरी इच्छा पूरी होती दिखाई देती है।
मैं तो अपना कार्य कर चुका। मैंने मुसलमानों में से एक नवयुवक निकालकर
भारतवासियों को दिखला दिया, जो सब परीक्षाओं में पूर्णतया उत्तीर्ण हुआ। अब
किसी को यह कहने का साहस न होना चाहिए कि मुसलमानों पर विश्वास न
करना चाहिए। पहला तजुर्बा था, जो पूरी तौर से कामयाब हुआ। अब देशवासियों
से यही प्रार्थना है कि यदि वे हम लोगों के फाँसी पर चढ़ने से जरा भी दुखित
हुए हों, तो उन्हें यही शिक्षा लेनी चाहिए कि हिन्दू-मुसलमान तथा सब राजनैतिक
दल एक होकर कांग्रेस को अपना प्रतिनिधि मानें। जो कांग्रेस तय करें, उसे सब
पूरी तौर से मानें और उस पर अमल करें। ऐसा करने के बाद वह दिन बहुत
दूर न होगा जबकि अंग्रेजी सरकार को भारतवासियों की माँग के सामने सिर