सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
रामप्रसाद 'बिस्मिल' की आत्मकथा (काकोरी के अमर शहीद की जेल डायरी व आत्मकथा)

रामप्रसाद 'बिस्मिल' की आत्मकथा (काकोरी के अमर शहीद की जेल डायरी व आत्मकथा)

Autobiography of Ram Prasad Bismil

पं. रामप्रसाद 'बिस्मिल' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished128 पृष्ठ

पृष्ठ 119, कुल 128 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 119

वृहत् संगठन 107
नवयुवकों को फँसाया गया और सी. आई. डी. वालों ने अपनी डायरी दिखलाकर
फैसला लिखाया। काकोरी षड्यंत्र में भी अंत में ऐसा ही हुआ। सरकार की सब
चालों को जानते हुए भी मैंने सब कार्य उसकी लंबी-लंबी बातों की पोल खोलने
के लिए ही किए। काकोरी के मृत्युदंड पाए हुओं की दया-प्रार्थना न स्वीकार करने
का कोई विशेष कारण सरकार के पास नहीं। सरकार ने बंगाल आर्डिनेंस के
कैदियों के संबंध में जो कुछ कहा था, सो काकोरी वालों ने किया। मृत्यु-दंड को
रद्द कर देने से देश में किसी प्रकार की शांतिभंग होने अथवा किसी विप्लव हो
जाने की संभावना नहीं थी। विशेषतया जब कि देश भर के सब प्रकार के
हिन्दू-मुसलमान असेंबली के सदस्यों ने इसकी सिफारिश की थी। षड्यंत्रकारियों
की इतनी बड़ी सिफारिश इससे पहले कभी नहीं हुई। किंतु सरकार तो अपना
सारा सीधा रखना चाहती है। उसे अपने बल पर विश्वास है। सर विलियम मेरिस
ने ही स्वयं शाहजहाँपुर तथा इलाहाबाद के हिन्दू-मुस्लिम दंगे के अभियुक्तों के
मृत्यु-दंड रद्द किए हैं, जिनको कि इलाहाबाद हाई कोर्ट से मृत्यु-दंड ही देना उचित
समझा गया था और उन लोगों पर दिन दहाड़े हत्या करने के सीधे सबूत मौजूद
थे। ये सज़ाएँ ऐसे समय माफ की गई थीं, जबकि नित्य नए हिन्दू-मुस्लिम दंगे
बढ़ते ही जाते थे। यदि काकोरी के कैदियों को मृत्यु-दंड माफ करके, दूसरी सज़ा
देने से दूसरों का उत्साह बढ़ता तो क्या इसी प्रकार मजहबी दंगों के संबंध में भी
नहीं हो सकता था? मगर वहाँ तो मामला कुछ और ही है, जो अब भारतवासियों
के नरम से नरम दल के नेताओं के भी शाही कमीशन के मुकर्रर होने तथा उनमें
एक भी भारतवासी के न चुने जाने, पार्लियामेंट में भारत सचिव लार्ड बर्कन हेड
के तथा अन्य मजदूर दल के नेताओं के भाषणों से भली-भाँति समझ में आया है
कि किस प्रकार भारत को गुलामी की जंजीरों में जकड़े रहने की चालें चली जा
रही हैं।
मैं प्राण त्यागते समय निराश नहीं हूँ कि हम लोगों के बलिदान व्यर्थ गए।
मेरा तो विश्वास है कि हम लोगों की छिपी हुई आहों का ही यह नतीजा हुआ