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सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

पृष्ठ 97, कुल 269 में से

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पृष्ठ 97

"? No.
Let's look at: "जयंत औ की दू"
Yes, it literally reads: जयंत औ की दू or जयंत औ की दू.

Let's check line 22:
कहे दूनौ कृष्णपक्ष तिनकी संधिमें स्वच्छ संध्या सधी है स्थित है जाको प्रत्यक्ष ही

Line 23:
लक्षिये कहे देखियत है औ शोभा सों मोहित है कृष्णपक्षरूप राम हैं शुक्लपक्ष

Line 24:
रूप लक्ष्मणहैं संध्यारूप सीताहैं अथवा दूनों जे पक्ष हैं तिनमें संधि कहे
Wait, "लक्ष्मणहैं" - space or no space? "लक्ष्मणहैं संध्यारूप सीताहैं" (no space between लक्ष्मण and हैं, space before संध्यारूप).

Line 25:
मध्य है तौ शुक्लादि गणना सों दुवौ पक्षनको मध्य पूर्णिमा है तौ संधिपदते
Wait, "दुवौ पक्षनको" - yes.
"संधिपदते" - yes.

Line 26:
पूर्णिमा जानौ याहूमें पूर्णिमारूप सीता हैं दुवौ पक्षरूप राम लक्ष्मण हैं औ

Line 27:
तीनों संध्या परस्परसधी हैं अर्थ कि एकत्र हैं प्रातःसंध्या रक्त है मध्याह्न
Wait, "परस्परसधी" - yes.
"मध्याह्न" - yes.

Line 28:
`संध्या शुक्ल है