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सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

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पृष्ठ 96

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( ९० ) रामचन्द्रिका-सटीक ।
सीताहैं औ कहूं सिद्धि मनो फल्योपाठ है सो अर्थ खुल्यो है ॥३०॥ उछाह जो
आनंदहै तेहिते सबपुर चल्यो कहे सब पुरवासी चले तो या जानो पुरीमें उछाहहू
रामहीं के साथ चलो गयो ॥ ३१ ॥ गेहु कहे पिंजरा ॥ ३२ ॥
मू०-चित्रपदाछंद ॥ रूपहिदेखतमोहें । ईशकहौनरकोहैं ॥
संभ्रमचित्तअरुझै । रामहियोंसबबूझै ॥ ३३ ॥ चंचरीछंद ॥
कौनहौकिततेचलेकितजातहौकेहिकामजू । कौनकीदुहिताब-
हूकहिंकौनकीयहवामजू ॥ एकगाँवउरहौकिसाजनमित्रबंधुब-
खानिये । देशकेपरदेशकेकिधौंपंथकीपहिचानिये ॥ ३४ ॥
जगमोहनदंडक ॥ किधौयहराजपुत्रीबरहींवर्योहैकिधौउपधि-
बरचोहै यहिशोभाअभिरतहै। किधौरतिरतिनाथजससाथके-