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सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

पृष्ठ 92, कुल 269 में से

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पृष्ठ 92

( ८६ ) रामचंद्रिका-सटीक ।

नसेव ॥ १२ ॥ पतिदेइजोअतिदुःख। मनमानिलैजैसुःख ॥
सबजक्तजानिअमित्र । पतिजानिकेवलमित्र ॥ १३ ॥ अमृ-
तगतिछंद ॥ नितपतिपंथहिचलिये । दुखसुखकोदलुदलिये
तनमनसेवहुपतिको । तबलहियेशुभगतिको ॥ १४ ॥ स्वा-
गताछंद ॥ योगयागब्रतआदिजोकीजै । न्हानगामगनदान
जो दीजै ॥ धर्म कर्मसबनिष्फलदेवा । होहिंएकफलकैपति
सेवा ॥ १५ ॥
टी०-तुम क्यों चलौ वन इत्यादि दश छंदानमें पातिब्रत धर्म सुनाइ रामचन्द्र
माता को बोध करत हैं राजकहे राजा दशरथ अथवा राजस्त्रिन करिकै केवल
पतिही को देवजानिये कहे जानो चाहिये ॥ ११ ॥ १२ ॥ १३ ॥ पतिही स्त्रिन
करिकै नित्यप्रति पथ कहे सुराहशास्त्रोक्तपतिब्रतनकी रीति इति तामें चलिये या
प्रकार सुख औ दुःख के दल कहे समूह को दलिये कहे विताइये औ तन औ
मन सों केवल पतिही को सेवहु कहे सेवन करिये तब शुभगति को पाइये कछू
सुख दुख परै तामें स्त्रीको पतिही की सेवा करिवो उचित है और उपाय करिवो
उचित नहीं है इति भावार्थः ॥ १४ ॥ देव कहे देवता अर्थ देवपूजा ॥ १५ ॥
मू०-तातमातुजनसोदरजानौं । देवरजेठसगे सो बखानौं ॥
पुत्रपुत्रसुतश्रीछबिछाई । है बिहीनभरतादुखदाई ॥ १६ ॥
कुंडलिया ॥ नारीतजैनआपनो, सपनेहूँभरतार ॥ पंगुगुं-
गुबौराबधिर, अंधअनाथअपार ॥ अंधअनाथअपारवृ-
द्धवावनअतिरोगी बालकपंडुकुरूपसदाकुवचनजडयोगी ॥
कलहीकोढीभीरुचोरज्वारी व्यभिचारी । अधमअभागीकु-
टिलकुपतिपतितजैननारी ॥ १७ ॥ पंकजवाटिकाछंद ॥
मारितजैनमरेभरतारहि । तासंगसहतिधनंजयझारहिं ॥ जी-
केहूँकरतारजिआवत । तौताकोयहबातसुनावत ॥ १८ ॥
निशिपालिकाछंद ॥ गानविनमानविनहासविनजीवहीं । तत्त