रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)
Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary
महाकवि केशवदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंग्मकहें प्रेम में भीजे जे सब पुरवारीहिँ तिन करिकै भूषण पट दीजै कहै दीजि-
यत हैं अर्थ प्रेमसों युक्त सब भूषण पटदान करत हैं ॥ २० ॥
मू०-सोरठा ॥ रघुपतिपूरणचंद, देखिदेखिसबसुखमढैं ॥
दिनदूनेआनंद, तादिनितेतेहिपुरबढैं ॥ २१ ॥
इति श्रीमत्सकललोकलोचनचकोरचिंतामणिश्रीरामचन्द्रचन्द्रिकायामिंद्र-
जिद्विरचितायांरामस्यायोध्यानगरप्रवेशोनामाष्टमः प्रकाशः ॥ ८ ॥
इति श्रीमज्जगज्जननीजनकजानकीजानकीजानिप्रसादाय जनजानकीप्र-
सादनिर्मिताया रामभक्तिप्रकाशिकायामष्टम प्रकाशः ॥ ८ ॥
मू०-दोहा ॥ यहप्रकाशनवमेंकथा, रामगमनबनजानि ॥
जनकनंदिनीको सुकृत, वर्णन रूप बखानि ॥ १॥ रामचंद्र
लक्ष्मणसहित, घरराखे दशरथ ॥ बिदाकियोननसारको, सँग
शत्रुघ्नभरत्थ ॥ २ ॥ तोटकछंद ॥ दशरत्थमहामनमोदरये ।
तिनबोलिवशिष्ठहिंमंत्रलये ॥ दिनएककहोशुभशोभरयो ।
हमचाहत रामहिंराजदयो ॥ ३ ॥ यहबातभरत्थकीमातसुनी।
पठऊं बनरामहिंबुद्धिगुनी ॥ तेहिमंदिरमेंनृपसोंबिनयो । वरदे
हुहतोहमकोजोदयो ॥ ४ ॥ नृपबातकहीँसिहेरिहियो । बर
मांगिसुलोचनिमैंजोदियो ॥ कैकेयी ॥ नृपतासुविशोभिभरत्थ
लहैं । बरषैबनचौदहरामरहैं ॥ ५ ॥
टीका-॥ १ ॥ २ ॥ शोभरयो राजाको विशेषणहै ॥ ३ ॥ ४ ॥ ५ ॥
मू०-पद्धटिकाछंद ॥ यहबातलगीउरवज्रतूल । हियफा-
ट्योज्योंजीरनदुकूल ॥ उठिचलेविपिनकहँसुनतराम । तजि
तातमाततियबंधुधाम ॥ ६ ॥ हरिलीलाछंद ॥ छूटेसबै
सबनिकेसुखक्षुत्पिपास । विद्वद्विनोदगुणगीतविधानवास ॥