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सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

पृष्ठ 87, कुल 269 में से

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पृष्ठ 87

कहे अग्रभाग जे पुरीके आठहैं ॥ तिनमें आठ दरवार कहे सभा विराजत हैं अर्थ
आठ प्रकारके कोट होतहैं यथा नरपती । “अतिदुर्गं कालवर्मं चक्रावर्त्तं च
डिंबुरम् । तटावर्त्तंच पद्माख्यं यक्षभेदं च सार्वगम् । कोटचक्रं प्रवक्ष्यामि विशेषादृष्टधा-
च तत्” ॥ सो जैसे एक ओर पद्माख्य कोटदेख्यो तैसे पुरीके आठहू ओर शहर
पनाहमें आठहू प्रकार के कोटबनेहैं तिनमें राजाके आठ मंत्रीहैं। यथा वाल्मीकीये-
“धृष्टिर्जयंतो विजयः सिद्धार्थोत्यर्थसाधकः । अशोको मंत्रपालश्च सुमंत्रश्चाष्टमो
महान्” । ते मंत्री तिन कोटनमें आठहू दिशानके प्रजान संग सभा करतहैं अथ तिनमें
बैठि आठहू दिशान को मामलो करतहैं अथवा दरबार कहे मुख्यद्वार पुरद्वार इति
अर्थ-पुरीके शहरपनाह में आठहू दिशान में आठद्वार बनेहैं यथा कविप्रियायां ।
“नींके के केवार देहों द्वारद्वार दरबार केशवदास आम खास शूर जोन
छावैगो” ॥ ५ ॥
मू०-