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सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

पृष्ठ 86, कुल 269 में से

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पृष्ठ 86

(८०) रामचन्द्रिका-सटीक ।
हुतेसबहोरेसीतहिब्याहिअभीतचल्योगिरिगर्वचढेभृगुनंदउतारे।
श्रीगरुडध्वजकोधनुलेरघुनन्दनऔधपुरिपगुधारे ॥ ५६॥
इति श्रीमत्सकलोलोचनचकोरचिन्तामणि-श्रीरामचन्द्रचन्द्रिकाया-
मिंद्रजिद्विरचितायां परशुरामसंवादवर्णनं नाम सप्तमः प्रकाशः ॥ ७॥
टीका-॥ ५२ ॥ सब जे देवऋषि आदिहैं तिनका सुख दीन अबदशकंठको
मारौ ऐसी जो परशुराम कृत आशिष है ताके रसमें भीने ॥ ५३ ॥ ५४ ॥ पर-
शुरामके भयसों मूर्च्छाको प्राप्त जे दशरथ हैं तिनको जगाइके औ परशुराम
हारिकै गये यह कहि संभ्रम भगाइके ॥ ५५ ॥ गर्वके गिरिपरचढे रहे तासों उ-
तारचो अथवा गर्वका गिरि सोई परशुराम पर चडो रहै सो उतारो ॥ ५६ ॥
इति श्रीमज्जगज्जननीजनकजानकीजानकीजानिप्रसादाय जनजानकीप्रसाद
निर्मिताया रामभक्तिप्रकाशिकाया सप्तमः प्रकाशः ॥ ७॥
मू०-दोहा ॥ यहप्रकाशअष्टमकथा, अवधप्रवेशबखा-
नि । सीतावर्ण्योदशरथहि, औरबंधुजनमानि ॥ १ ॥ सुमु-
खीछंद् ॥ सबनगरीबहुशोभरये । जहँतहँमंगलचारठये ॥
बरणतहैंकविराजबने । तनमनवृद्धिविवेकसने ॥ २ ॥ मोट-
नकछंद् ॥ ऊंचीबहुवर्णपताकलसैं । मानोपुरदीपतिसीदर
सैं॥ देवीगणव्योमविमानलसैं । शोभैतिनकेमुखअंचलसैं ॥
॥ ३॥ दोहा ॥ कलभनलीनेकोटपर, खेलतशिशुचहुँवोर ।
अमलकमलऊपरमनो, चंचरीकचितचोर ॥ ४॥ कलहंस
छंद् ॥ पुरआठआठदरबारविराजैं । युतआठआठसैनापति
राजैं ॥ रहैंचारिचारिघटिकापरिमानै । घरजाहिँऔरजबआ-
वतजानै ॥ ५ ॥
टी०-मंगलाचार बंदनवारादि ॥ १ ॥ २ ॥ ३ ॥ कलभ छोटे हाथी कमल
सदृश कह्यो तासों पद्माख्य कोट जानो ताको भेद आगे कहिहैं ॥ ४ ॥ पुर