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सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

पृष्ठ 78, कुल 269 में से

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पृष्ठ 78

( ७२ ) रामचन्द्रिका-सटीक ।
नगेषक़ालगतिजानिनजाई । होनहारह्वैरहैमिटैमैटिनमिटाई ॥
होनहारह्वैरहैमोहमदस्रबकोछूटै ॥ होइतिनूकावज्रवज्रतिनु
काह्वैतूटै ॥ २१ ॥ परशुराम-विजयछन्द ॥ केवशहैहय
राजकोमासहलाहलकौरनखाइलियोरे । तालगिमेदमही
पनको घृत घोरिदियोनसिरानोहियोरे । खीरषडाननकोमद
केशवसोपलमेंकरिपानलियोरे । तौलौंनींसुखजौलहुंतूरघृ-
वंशकोशोनसुधानपियोरे ॥ २२ ॥
टी०-हैहयराजको मासरूपी जो हलाहल विष है मेद चरबी खीर दूध
षडाननस्वामिकार्तिक यायुक्तिसों आपनो सकलबल कृत सुनाय भयदेखायो
मरुत्त्वती उक्तार्थः ॥ हे कुठार ! यद्यपि तू ऐसे कृत करचो है परंतु जबलग
[---]वंश जे रामचंद्रहैं तिनको सो कहे तिनको ऐसो न कहे स्तुत्य मधुर इति सुधा-
[---]म वचन नहींपियो तौलौं तोको सुख नहीं है इहां सुधा जो उपमानहै ताके
द्वारासों मधुर वचन उपमेयको ग्रहण कियो तू सकल क्षत्रिनको क्षयकरचौ है
औ ये आत बलवान क्षत्रवंशमें उत्पन्न भये सो वैर समुझि तेरो नाशकारबेको
समर्थ हैं ताते ये जबलौं मधुर वचनसों तेरो दोषक्षमानहींकरत तौलौं तोकों
सुखनहीं है इतिभावार्थः । ‘तः पुमान्सुगते वंध्येद्धिरण्डप्रस्तुते पिचेतिमे-
दिनौ’ ॥ २१ ॥ २२ ॥
मू०-भरत-तंत्रीछन्द ॥ बोलतकैसेभृगुपतिसुनियेसोकहि-
येतनमनबनिआवौ ॥ आदिबड़ैहौबडपनराखौ जातेतुमसब
जगयशपावौ ॥ चन्दनहूंमेंअतितनघरियेआगिउठैयहगुण
सबलीजै । हैहयमोरेन्पतिसंहारेसोयशकैनियुगयुगजीजै
॥ २३ ॥ परशुराम-नाराचछंद ॥ भलीकहीभरत्थतैंउठाय
आगिअंगतैं । चढाउचोपिचापआपबाणलेनिषंगतैं ॥ प्रभा-
उआपनोदेखाउछोडिबालभाइकै । रिझाउराजपुत्रमोहिंराम
लैछुडाइकै ॥ २४ ॥ सोरठा ॥ लियोचापजबहाथ, तीनिहुभै
यनरोषकरि वरज्योश्रीरघुनाथ,तुमबालकजानतकहा ॥२५॥