रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)
Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary
महाकवि केशवदास द्वारा
DevanagariHindipublished269 पृष्ठ
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सप्तमप्रकाशः ७. ( ७१ )
कहै अपरमान बडा इति है तेज जिनको औ भर्ग महादेवके भक्तहैं औ भार्गव जे
भृगुवंशीहैं तिनके ईशहैं अर्थ भृगुवंशमें ये बडे ऐश्वर्य युक्त हैं ॥ १७ ॥
मू०-तोमरछन्द ॥ सहभरतलक्ष्मणराम ॥ चहुँकियेआ-
निप्रणाम ॥ भृगुनन्दआशिषदीन । रणहोहुअजयप्रवीन ॥
॥ १८ ॥ परशुराम ॥ सुनिरामचन्द्रकुमार । मनवचनकी
र्तिउदार ॥ राम ॥ भृगुवंशकेअवतंश । मनवृत्तिहैक्यहिअं-
श ॥ १९ ॥ परशुराम ॥ मदिराछन्द ॥ तोरिशरासनशं-
करको शुभसीयस्वयंबरमांझवरी ॥ तातेबढ्योअभिमानम-
हामन मेरीयोनैकनशंककरी ॥ राम ॥ सोअपराधपगेहम-
सों अवक्यौंसुधरैतुमहूंधौंकहो ॥ बाहुदैदोउकुठारहिकेशव
आपनेधामकोपंथगहो ॥ २० ॥
टी०-अजय