रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)
Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary
महाकवि केशवदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंरामचंद्रप्रकाशः ७. (६९)
कहिकौनरामनजानियो ॥ वामदेव ॥ शरताड़काजिनमारि-
यो ॥ १० ॥ परशुराम-विनयछन्द ॥ ताड़कासंहारी तिय
नविचारीकौनबड़ाईताहिहने ॥ वामदेव ॥ मारीचहुतेसंगप्र-
बलसकलखलअरुसुबाहुकाहूनगने ॥ करिक्रतुरखवारीगुरु
सुखकारी गौतमकीतियशुद्धकरी । जिनरघुकुलमंज्योहरध-
नुर्भंज्योसीयस्वयम्बरमांझबरी ॥ ११ ॥
टी०-जो ऐसो दीनहै ताकोमारिवो अनुचित है ता लिये कहतहूँ ॥ ८ ॥
शिरखीन कहे अग्नि मो सखा कुथागको सम्बोधन है सुखही कहे महजरी ॥ ९ ॥
॥ १० ॥ गुरुजे विश्वामित्र हैं तिनको सुखकारी क्रतु जो यज्ञहै ताको रखवारी
करिकै ॥ ११ ॥
मू०-दोहा ॥ हरहूहोतोदंडद्वै, धनुषचढ़ावतकष्ट ॥
देख्योमहिमाकालकी, कियोसोनरशिशुनष्ट॥ १२॥ विजय ॥
बोरौंसबैरघुवंशकुठारकी धारमेंवारनबाजिसरत्थहि । बा-
णकीवायुउडाइकैलक्षन लक्षिकरौअरिहासमग्रत्थहि । रामहिं
वामसमेतपठैबन कोपकेभारमेंभूंजोंभरत्थहि । जोधनुहाथ
धरैरघुनाथतौआजुअनाथकरौंदशग्रत्थहि ॥ १३ ॥
टी०-सरस्वती उक्त्यर्थ- स कहे सहित दै कहे निश्चय अर्थ निश्चयकरि
रघुवंशके जे कुठारशत्रुहैं तिन्हें वारन वाजिरथ सहितकीकहे समुद्रादि जलाश-
यकी धारप्रवाहमें बोरों 'कंजलमस्मिन्नस्तीति' की अर्थ जामें जल रहै सो की
कहावै वंशपद श्लेष है वांसहू को नामहै ताकुठारपदकह्यो वारनवाजि सरथ कहि
या जनायो कि जामें उनको चिह्नहू न रहै औ लक्ष्मण कहे लाखन जे रघुवंश-
के शत्रुहैं तिन्हें बाण की वायुमां उडाइकैकै हा कहे हाइहाइ जो शब्द हैं ताहीमें
समग्रत्यक्ष कहे निशाना करों अर्थ ऐसी वाणवृष्टि करों जामें केवल हाइहाइ-
करै औ पराक्रम करिवे लायक ना रहै औ जयगमहि कहे केवल रामचन्द्रहीसों
वामकहे कुटिलता समेति हैं अर्थ जे गमहीके शत्रु हैं तिन्हें वनको पठै देउँ
औ जे नरत्थहि वाम समेति हैं अर्थ भरन के शत्रु हैं तिन्हें शोकके आगमें
भूँजों औ जो धनुष को रघुनाथ हाथमें लियो कहे उठायो तौ आजु दशग्रथ को