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सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

पृष्ठ 73, कुल 269 में से

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पृष्ठ 73

सप्तमप्रकाशः ७. ( ६७ )
पालिकाछन्द ॥ दानदियराजदशरथसुखपाइकैकै । शोधिवि-
प्रब्रह्मऋषिराजनिबोलाइकैकै ॥ तोषियाचकसल दादुरमयूं-
रसे । मेघजिमिबर्षिगजब्राजियमयूरसे ॥ ६७ ॥
इतिश्रीमत्सकलोकलोचनचकोरचिन्तामणिश्रीरामचन्द्रचन्द्रिकाया-
मिन्द्रजिद्विरचितायां सीताराम विवाहवर्णनंनामषष्ठः प्रकाशः ॥ ६ ॥
टी०-राजा दशरथ के साथ जे आसमुद्र के क्षितिनाथ रहे तिन्हें राजा दश-
रथके साथ जनकगज बरतौनीपहिरायो विदा समयकी पहिराविनि बरतौनी
नामकरि पश्चिममों प्रसिद्धहै ॥ ६६ ॥ बरतौनीकी पहिरावतिके बादि जनकपुर-
वासिनको राजा दशरथ यथोचितदानदियो ऋषिराजनपदवी ब्रह्म ऋषिराज
ब्राह्मणराज पदको अनुषंगऋषिरूपमेंहै ॥ ६७ ॥
इति श्रीमज्जगज्जननीजनकजानकीजननीजानकीप्रसादायजनजानकीप्रसाद
निर्मितायां रामभक्तिप्रकाशिकायां सीतारामविवाहवर्णननामषष्ठः प्रकाशः ॥ ६ ॥
मू०-दोहा ॥ याप्रकाशसप्तमकथा, परशुरामसंवाद ॥
रघुवरमोंअरुरोषत्यहि, भंजनमानविषाद ॥ १ ॥ विश्वामि-
त्रबिदाभये, जनकाफिरेपहुँचाइ ॥ मिलेआगिली फौजको,
परशुराम अकुलाइ ॥ २ ॥ चंचरीछन्द ॥ मत्तदन्तिअमत्त
होगये देखि देखिनगजहीं । ठौर ठौरसुदेशकेशव दुन्दुभी
नहिंबज्जहीं । डारिडारिहथ्यारशूरजजीव लै लै भज्जहीं ॥ का-
टिकैतनत्राणएकैनारिषेतलज्जहीं ॥ ३ ॥ दोहा ॥ वामदेव
ऋषिसोंकह्यो, परशुरामरणधीर । महादेवकोधनुषयह, को
तोरेउबलवीर ॥ ४ ॥ वामदेव ॥ महादेवकोधनुषयह, पर-
शुरामऋषिराज । तोरेउरायकहतहीं, समुझेउरावणराज ॥
॥ ५ ॥ परशुराम ॥ अतिकोमल नृपसुतनकी, ग्रीवादलीअ-
पार ॥ अबकठोरदशकंठके, काटहुँकंठकुठार ॥ ६ ॥ परशु