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सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

पृष्ठ 68, कुल 269 में से

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पृष्ठ 68

( ६२ ) रामचन्द्रिका-सटीक ।

माला हैं ते मानो अनेक धारा है मण्डपमें आकाशगंगा राजती हैं ॥ ४० ॥
गजदन्त जे टोडा हैं तिनकी अवली सुदेश कहे सुन्दर रौसयुक्त बनी हैं
आकाश मे वर्त्तमान विमान सदृश गजदन्त के रौसहैं देवी सरिस नृपकुमा-
रिका ह ॥ “नागदन्तोहस्तिदन्ते गेहान्निःसृतदारुणी” त्यभिधानचिन्तामणिः
॥ ४१ ॥ कलानिधि चन्द्रमा । ॥ ४२ ॥ मानो मनोजमय कहे मनोज प्रधान
मनोज जो कन्दर्प है सोई है प्रधान देवता जिनके ऐसे धनुषहैं अर्थ मानो
कामके धनुष हैं यह लेखे कहे ठहरायो है अथवा मनोमय कहे अनेक मनन
करिकै युक्त अर्थ सुन्दरतासों जिनमें अनेक मन बसे हैं ऐसे मनोजके धनुषहैं
चर्चितपूजितयुक्तितिसुखकहे स्वाभाविक ॥ ४३ ॥
मू०-दोहा ॥ अमलकपोलैआरसी, बाहूचम्पकमार ॥
अवलोकनैविलोकियें, मृगमदमयघनसार ॥ ४४ ॥ गतिको
मारमहावरे, अंगअंगकोभार ॥ केशवनख