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सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

पृष्ठ 63, कुल 269 में से

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? In L4: क-ी-न-्-ह-ा-ँ -> looks like कीन्हां or कीन्हों? Wait, look at the matra: it's on the right of ह. There is a vertical bar with a top hook or dot? It's कीन्हीं or कीन्हां? Actually it has an 'ा' and a top mark, could be कीन्हों or कीन्हीं. Wait, L3 has कीन्हों. L4 has कीन्हीं - wait, भंग कीन्हीं जा -> धनुष भंग कीन्हीं or कीन्हों? In Braj, often 'कीन्हीं' or 'कीन्हों'. Let's look at the character: क-ी-न-्-ह-ा-ँ -> कीन्हां or कीन्हीं. It really looks like कीन्हीं).
धनुषको तीनों लोक के प्राणिन उठायो ना उठ्यो तब भ्रमें कहे संदेहको प्राप्त भये
अथवा ऐसी अवस्था में ऐसो धनुष तोर्यो यासों तीनहूं लोक भ्रमें औ आपु कैसे
हैं कि जिन अनेक अदेव दैत्यनको मार्यो है औ मदापुरन्दर इन्द्रकी रक्षा करतहौं
यासों या जनायो कि ऐसे उद्धत कर्म करिवे को तुम्हारे घरकी परम्परा की रीति है
अनंत