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सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

पृष्ठ 61, कुल 269 में से

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पृष्ठ 61

ये । राजराजसवडेरहिआये ॥ हीरचीरगजबाजिलुटाये ।
सुंदरिन बहुमंगलगाये ॥ ११ ॥ सोरठा ॥ वासरचौथेयाम,
सतानंदआगू दिये ॥ दशरथनृपकेधाम । आयेसकलविदेहब-
नि ॥ १२ ॥ भुजंगप्रयातछंद ॥ कहूँशोभनादुंदुभीदीहबा
जैं । कहूँभीमझंकारकर्नालसाजैं ॥ कहूँसुंदरीवेनुवीनाबजा-
वैं । कहूँकिन्नरीकिन्नरैलैसुगावैं ॥ १३ ॥ कहूंनृत्यकारीनचैं
शोभसाजैं । कहूँभांडबोलैंकहूँमल्लगाजैं ॥ कहूँभाटभाव्यो
करैंमानपावैं । कहूँलोलिनीबेदिनीगीतगावैं ॥ १४ ॥ कहूँ
बैलभैंसाभिरैंभीमभारे । कहूँएणएनीनकेहेतकोरे ॥ कहूँवोक
बाँकेकहूँमेषशूरे । कहूॅमत्तदंतीलरैंलोहपूरे ॥ १५ ॥
टीका-मागध वंशावली वर्णन करैया सूत स्तुति करैया चारण प्रेष्य ए भाट-
की जाति हैं शुभ अशुभ निवारण कहे शुभमें अशुभ के निवारण मेटनहार निष्क-
मति कहे उत्तम मति ॥ ९ ॥ समिध होमकी लकड़ी ॥ १० ॥ ११ ॥ वासर
के चौथे याम कहे तीनि पहर दिनबीतेके उपरांत दशरथ के धामकहे जनवास-
मंदिरमें विदेह कहे जनकके गोत्री ॥ १२ ॥ तीनि छंदको अन्वय एक है राजा
दशरथके फौजमें ऐसो कौतुक देखत भये किन्नरी सारंगी ऐनी हरिणीनसौं हेत
करियत हरिण परस्पर भिरतहैं भिरत पदको अनुषंग एतहू मे है मेष भेडा लोह पूरे
जंजीरहू कौ पहिरे अथवा वीरतासों युक्त ॥ १३ ॥ १४ ॥ १५ ॥
मू०-दोहा ॥ आगेह्वैदशरथलियो, भूपतिआवतदेखि ॥
राजराजमिलिबैठियो, ब्रह्मब्रह्मऋषिलेखि ॥ १६ ॥ सता-
नंद-शोभनाछंद ॥ मुनिभरद्वाजवशिष्ठअरुजाबालिविश्वामि-
त्र । सबैहौतुमब्रह्मऋषिसंसारशुद्धचरित्र ॥ कीन्होंजोतुमया
वंशपैकहिएकअंशनजाइ । स्वादकहिबेकोसमर्थनगूँगज्योंगु
रखाइ ॥ १७ ॥ अन्यच्च-सुखदाछंद ॥ ज्योंअतिप्यासोपा-
वैमगमेंगंगजुलु ॥ प्यासनएकबुझाईबुझैनैतापबलु ॥ त्यों