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सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

पृष्ठ 60, कुल 269 में से

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पृष्ठ 60

सबभूप ॥ ६॥ त्रिभंगीछंद ॥ दशरथसंघातीसकलबरा-
तीबनिबनिमंडपमाहँगये । आकाशविलासीप्रभाप्रकाशी ज-
लजगुच्छजनुनखतनये ॥ अतिसुंदरनारीसबसुखकारीमंगल
गारीदेनलगीं । बाजेबहुबाजतजनुघनगाजतजहांतहांशुभ
शोभजगीं ॥ ७ ॥ दोहा ॥ रामचन्द्रसीतासहित, शोभतहैं
त्यहिंठौर । सुवरणमयमणिमयखचित, शुभसुंदरशिर
मौर ॥ ८ ॥
टीका-एकही दिशासों चारों बरातें आवतीं तौ एक एक बरातकी अगवानी-
में बेर होती व्याहकी लगन टरिजाती तासों एकही बार अगवानी होबेके लिये
चारों बरातें चारों दिशाह्वै आईं सागर सरिस राजा जनक हैं सरिता सरिस चारों
बरातें हैं बाहै सरिस अगवानी की चारोंचमू हैं ॥ ५ ॥ बारोठे को चारकहे द्वार-
पूजा अनुरूप यथोचित पहिराइयो पदते भूषण वस्त्र पहिराइयो जानौं ॥ ६ ॥
बारोठेको चारकरि जनवासमंदिरको गये इति कथाशेषः जनवास मंदिर ते भां-
वरि करिबेके लिये मंडपकहे माँडवमें गये सो मंडप कैसो है आकाश विलासी
कहे आकाश को ऐसो है विलास कौतुक जाको अर्थ अति दीर्घ अति उच्च है औ
आकाश में नक्षत्र हैं इहां झालरन में लगे प्रभा प्रकाशी कहे अति शोभायुक्त
जे जलजमोतिनके गुच्छ हैं तेई नये नवीन नक्षत्र हैं ॥ ७ ॥ खचित कहे
चित्रित ॥ ८ ॥
मू०-षट्पद ॥ बैठेमागधसूतविविधविद्याधरचारण ।
केशवदासप्रसिद्धसिद्धशुभअशुभनिवारण ॥ भरद्वाजजाबा-
लिअत्रिगौतमकश्यपमुनि । विश्वामित्रपवित्रचित्रमतिवामदेव
पुनि ॥ सबभांतिप्रतिष्ठितनिष्ठमतितहँवाशिष्ठपूजतकलश ।
शुभसतानंदमिलिउच्चरतशाखोच्चारस बैसरस ॥ ९ ॥ अनु-
कूलछंद ॥ पावकपूज्योसमिधसुधारी । आहुतिदीनीसबसु
खकारी ॥ दैतबकन्याबहुधनदीन्हों । भाँवरिपारिजगतयश
लीन्हों ॥ १० ॥ स्वागताछन्द ॥ राजपुत्रकनिसोंछबिछा-