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सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

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पृष्ठ 6

४) अनुक्रमणिका ।
सं. प्र. विषय. पृष्ठांक.
२७ सत्ताइसें प्रकाशमें, रामचन्द्र सुखसार ।
ब्रह्मादिक अस्तुति विविध, निजमतिके अनुसार ॥ २६१-२६६
२८ अट्ठाइसें प्रकाशमें, वर्णन बहुविधि जानि ।
श्रीरघुवरके राजको, सुरनरको सुखदानि ॥ २६७-२७०
२९ उनतीसएँ प्रकाशमें, वर्णण कह्यो चौगान ।
अवधि दीप शुककी विनति, राजलोक गुणगान ॥ २७१-२७९
३० या तीसएँ प्रकाशमें, बरण्यो बहुविधि जानि ।
रङ्गमहल संगीत अरु, रामशयन सुखदानि ॥ २८०-२९३
३१ इकतीसएँ प्रकाशमें, रघुवर बाग पयान ।
शुकमुखसिय दासीनको, वर्णन विविध विधान ॥ २९४-३०२
३२ बत्तीसएँ प्रकाशमें, उपवन वर्णन जानि ।
अरु बहुविधि जलकेलिको, करहु राम सुखदानि ॥ ३०२-३१०
३३ त्रयतीसएँ प्रकाशमें, ब्रह्माविनय बखानि ।
शम्बुक वध सिय त्याग अरु, कुश लव जन्मसो जानि ॥ ३१०-३१७
३४ आयो श्वान फिरचादिको, चौंतीसयें प्रकाश ।
अरुसनाढ्य द्विज आगमन, लवणासुरको नाश ॥ ३१७-३२५
३५ पैंतीसयें प्रकाशमें, अश्वमेध किय राम ।
मोहन लव शत्रुघ्नको, ह्वै है संगर धाम ॥ ३२५-३३०
३६ छत्तीसयें प्रकाशमें, लक्ष्मण मोह न जानि ।
आयसु लहि श्रीरामको, आगम भरत बखानि ॥ ३३०-३३५
३७ सैंतीसयें प्रकाशमें, लवकटुबैन बखानि ।
मोहन बहुरि भरतको, लागै मोहन बाण ॥ ३३५-३३८
३८ अडतीसयें प्रकाशमें, अङ्गदयुद्ध बखान ।
व्याज सैन रघुनाथको, कुशलव आश्रम जान ॥ ३३९-३४२
३९ नवंतीसयें प्रकाश सिय, राम संयोग निहारि ।
यज्ञ पूरि सब सुतनको, दीन्हों राज विचारि ॥ ३४२-३४८