रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)
Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary
महाकवि केशवदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअनुक्रमणिका । ( ३ )
सं. प्र. विषय. पृष्ठांक.
१३ या तेरहें प्रकाशमें, बालिवध्यो कपिराज ।
वर्णन वर्षा शरदको, उदधि उल्लङ्घनसाज ॥ १२४-१४४
१४ या चौदहें प्रकाशमें, हैहै लङ्कादाह ।
सागरतीर मिलान पुनि, करिहैं रघुकुलनाह ॥ १४४-१५३
१५ यह प्रकाश दश पश्चमें दशशिर करै विचार ।
मिलन विभीषण सेतु रचि, रघुपति जैहैं पार ॥ १५४-१६३
१६ यह वर्णनहै षोडशै, केशवदास प्रकाश ।
रावण अंगदसों विविध, शोभित वचन विलास ॥ १६३-१७३
१७ या सत्रहें प्रकाशमें, लङ्काको अवरोध ।
शत्रु चमू वर्णन समर, लक्ष्मणको परवोध ॥ १७३-१८२
१८ अष्टादशे प्रकाशमें, केशवदास कराल ।
कुम्भकर्णको वर्णियो, मेघनादको काल ॥ १८२-१९०
१९ या उन्नीस प्रकाशमें, रावण दुःख निधान ।
जूझैगो मकराक्ष पुनि, हैहै दूत विधान ॥ १९०-२०२
२० या बीसएँ प्रकाशमें, सीता मिलन विशेषि ।
ब्रह्मादिक अस्तुति गमन, अवध पुरीको लेषि ॥ २०२-२१४
२१ एकईसयें प्रकाशमें, कह ऋषिदान विधान ।
भरत मिलनकपिगुणनको, श्रीमुख आप बखानि ॥ २१४-२२४
२२ या बाइसें प्रकाशमें, अवधपुरिहि प्रवेश ।
पुरवासिन मातानिसों, मिलिबो रामनरेश ॥ २२४-२२८
२३ या तेइसयें प्रकाशमें, ऋषिजन आगमलेषि ।
राज्यश्री निन्दा कही, श्रीमुख राम विशेषि ॥ २२८-२३६
२४ चौबीसयें प्रकाशमें, रामविरक्ति बखान ।
विश्वामित्र वशिष्ठसों, बोधकही शुभआनि ॥ २३६-२४८
२५ कथापचीस प्रकाशमें, ऋषिवशिष्ठ सुखपाय ।
जीव उधारन रीति सब, रामहि कहो सुनाय ॥ २४८-२५६
२६ कथा छब्बीस प्रकाशमें, कह्यो वशिष्ठ विवेक ।